
भरतपुर।
शहर में पिछले डेढ़ महीने में मुश्किल से दो या तीन बार अच्छी बरसात हुई है। लेकिन इन बरसातों ने ही शहरी सरकार के माननीयों के उस दावे को झूठा साबित कर दिया कि शहर में सभी जगह सडक़ें बन चुकी हैं। क्योंकि पिछले एक साल में सभी सड़के बनाने का दावा किया गया था।
ये है वर्तमान हाल
अब लगभग हर सडक़ पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं। माननीयों के दावे गड्ढे बनकर बरसात में धुल रहे हैं। सरकूलर रोड, कुम्हेर गेटऑटो मोबाइल मार्केट, जघीना गेट के पास, राजेन्द्र नगर, जवाहर नगर, चौबुर्जा, गंगा मंदिर समेत दर्जनों स्थानों पर सडक़ें क्षतिग्रस्त हैं। जबकि केतन गेट से जनाना अस्पताल तक सडक़ धंसी हुई है।
ठेकेदार आता है और कंक्रीट और मिट्टी डालकर चला जाता है
ठेकेदार आता है और कंक्रीट और मिट्टी डालकर चला जाता है। जबकि निगम ने एक साल से पहले ही सडक़ क्षतिग्रस्त होने के बाद भी ठेकेदार पर एफआइआर तक दर्ज नहीं कराई। आए दिन सडक़ धंसने से वाहन उसमें फंस जाते हैं। जिन्हें निकालने में ही घंटों की मशक्कत करनी पड़ती है।
अब तक नहीं बने क्षतिग्रस्त सडक़ों के प्रस्ताव
जिले के भरतपुर नगर निगम समेत सभी 10 निकायों के जेईएन को बारिश के कारण क्षतिग्रस्त सडक़ व अन्य कार्यों के प्लान तीन दिन में बनाकर रिपोर्ट भेजनी थी। यूडीएच एवं स्वायत्त शासन विभाग के एसीएस पीके गोयल ने इसके निर्देश 10 दिन पहले दिए थे। इसमें प्रत्येक कनिष्ठ अभियंता को हर 10 दिवस में अपने क्षेत्र की प्रत्येक गलियों, सडक़ों व कॉलोनियों का भौतिक निरीक्षण स्वयं करने को कहा था। साथ ही निरीक्षण के दौरान सडक़ों का टूटना, सडक़ों व उसके आसपास गड्डे, बिजली की लाइन, पोल इत्यादि टूटना पाए जाने पर इन्हें अधिकाधिक तीन दिवस में दुरुस्त कराना तय किया था। लेकिन प्रस्ताव बनाना तो दूर अभी तक एक भी जेईएन ने नगर निगम या यूआईटी क्षेत्र में निरीक्षण तक नहीं किया है। यही कारण है कि गारंटी अवधि की सडक़ों के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।