BDA Big Decision : भरतपुर विकास प्राधिकरण ने चार लैंड पूलिंग योजनाओं में 17 राजस्व गांव और उनके खसरे शामिल किए हैं। प्राधिकरण का उद्देश्य इन गांवों को विकसित कर किसानों को वापस करना है। योजना में श्रीगिरिराज परिक्रमा मार्ग के राजस्थान के हिस्से को भी शामिल किया गया है।
BDA Big Decision : भरतपुर शहर के बाहर आगरा-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे 17 गांवों की जमीन पर अब बेचान की रोक लगा दी गई है। भरतपुर विकास प्राधिकरण ने द राजस्थान लैंड एक्ट 2016 के तहत चार लैंड पूलिंग योजनाओं के लिए भूमि चिह्नित कर 12 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी की गई है। इन योजनाओं में 17 राजस्व गांव और उनके खसरे शामिल किए गए हैं। प्राधिकरण का उद्देश्य इन गांवों को विकसित कर किसानों को वापस करना है। योजना में श्रीगिरिराज परिक्रमा मार्ग के राजस्थान के हिस्से को भी शामिल किया गया है।
इस प्रक्रिया में भूमि की अवाप्ति (अधिग्रहण) नहीं बल्कि नियोजन किया जा रहा है। राजस्थान लैंड पूलिंग एक्ट 2016 के तहत जमीन को एक्वायर नहीं किया जाता, बल्कि शहरों का पुनर्नियोजन कर उन्हें विकसित किया जाता है। इसके तहत बिजली के पोल, सड़क, पानी, बिजली, पार्क और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसके बाद विकसित भूमि किसान को वापस दे दी जाती है।
पहले 90ए के तहत 40 प्रतिशत जगह सुविधाओं के लिए उपयोग होती थी और 60 प्रतिशत बेची जाती थी, लेकिन नई लैंड पूलिंग के तहत 55 प्रतिशत जमीन खातेदारों को वापस दी जाएगी। 10 प्रतिशत भरतपुर विकास प्राधिकरण लेगा और शेष 35 प्रतिशत जमीन में सड़क, लाइट, ड्रेनेज सिस्टम, वाटर सप्लाई और सीवरेज सप्लाई सहित अन्य सुविधाएं विकसित कर इन्हीं किसानों को दी जाएंगी।
पहली लैंड पूलिंग स्कीम
मडौली में 317 खसरा, नगला झीलरा 154 खसरा, रामपुरा 92 खसरा, श्योराना 13 खसरा,नगला तेरहिया दो, नगला सैह 19 खसरा है। इसमें 597 खसरा है। कुल 156 हैक्टेयर भूमि है।
दूसरी लैंड पूलिंग स्कीम
रामपुरा में 183 खसरा और नगला सैह में 217 खसरा है। इसमें कुल 400 खसरा है। 151 हैक्टेयर भूमि है।
तीसरी लैंड पूलिंग स्कीम
मलाह में खसरा 362, खड़ेरा 76 खसरा, नगला सैह 194 खसरा, श्रीनगर 75 खसरा, रामपुरा 26 खसरा, रामनगर 44 खसरा है। इसमें कुल 777 खसरे हैं। कुल 295 हैक्टेयर भूमि है।
चौथी लैंड पूलिंग स्कीम
पूंछरी में 630 खसरा, सामई 1077 खसरा, खेड़ा ब्राह्मण 130 खसरा है। इसमें कुल 1837 खसरा है। इसमें 390.62 हैक्टेयर भूमि है।
नगर नियोजना निदेशक टाउन प्लानर मुकेश जांगिड़ ने बताया कि 2013 के भूमि अवाप्ति एक्ट के तहत जमीन अवाप्त की जाती थी और 75 प्रतिशत जमीन भरतपुर विकास प्राधिकरण के पास तथा 25 प्रतिशत खातेदारों के पास रहती थी। बीड़ीए की 15 साल पहले लॉन्च हुई 13 नंबर स्कीम अभी तक पूरी नहीं हुई है।
हालांकि, राजस्थान लैंड पूलिंग एक्ट के अंतर्गत ऐसी योजनाओं को 9 माह में विकसित कर खातेदारों को देना होगा। इन नई योजनाओं का प्रकाशन 12 मार्च 2026 को हो चुका है और इन्हें 9 माह के भीतर 17 गांवों को विकसित कर दिया जाएगा, इससे शहर का विकास होगा।
बीडीए की ओर से संबंधित गांवों की जमीन पर सड़क, बिजली, पानी, चिकित्सा, शिक्षा के संसाधन विकसित कराने के लिए योजना बनाई जाएगी। बाकी बची हुई भूमि में से 55 प्रतिशत तक खातेदारों को वापस दी जाएगी। इसके बाद वह उस भूमि का बेचान कर सकेंगे। इससे उस एरिया में सुव्यवस्थित विकास के साथ-साथ शहरी रूप में कॉलोनियां विकसित होंगी। जलभराव, सड़क आदि की समस्याएं नहीं आएंगी।