
-श्रावण मास पर चार सावन सोमवार और नागपंचमी पर बनेगा 23 वर्षों बाद विशेष संयोग
भरतपुर. भगवान शिव की आराधना के पवित्र श्रावण (सावन) मास की शुरुआत इस वर्ष 30 जुलाई से आयुष्मान और सौभाग्य योग जैसे शुभ संयोगों के साथ होगी। पहले दिन श्रवण नक्षत्र और गुरुवार का दुर्लभ मेल भी रहेगा, जिससे सावन का आरंभ अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है। पूरे माह में चार सावन सोमवार पड़ेगे, जिनमें पहले सोमवार को शिववास योग का विशेष संयोग रहेगा। वहीं श्रावण मास का समापन रक्षाबंधन पर्व के साथ होगा। पं. राममोहन शर्मा के अनुसार इस वर्ष सावन में बनने वाले योग और नक्षत्र शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहेंगे। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योग में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं सौभाग्य योग जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। श्रवण नक्षत्र में की गई शिव उपासना विशेष फलदायी होती है और गुरुवार होने से भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। इस वर्ष सावन के तीसरे सोमवार को नागपंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। यह विशेष संयोग करीब 23 वर्षों बाद बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर कच्चा दूध अर्पित करने तथा नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही सर्पदोष की शांति के लिए भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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सावन सोमवार का रहेगा विशेष महत्व
श्रावण मास में सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना तथा व्रत करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है, जबकि विवाहित दंपतियों के जीवन में सुख, प्रेम और सौहार्द बना रहता है। इस दौरान कांवड़ यात्रा और शिवालयों में जलाभिषेक का भी विशेष महत्व रहता है।