
Bharatpur Municipal Corporation Fake Land Lease Scam: भरतपुर नगर निगम की ओर से शहर में फर्जी पट्टे जारी करने का मामला सामने आया है। तीन दर्जन से अधिक ऐसे फर्जी पट्टे जारी होने की बात सामने आई है। हालांकि, जांच में 15 पट्टे फर्जी तरीके से जारी होना स्वीकार करते हुए उन्हें निरस्त भी कर दिया गया है। साथ ही, 25 पट्टा धारकों को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे गए हैं। उचित दस्तावेज सामने नहीं आने पर उन्हें भी निरस्त किया जाएगा। वहीं, सत्यापन करने वाले एक जेईएन को चार्जशीट दी गई है, जबकि दूसरे को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
राज्य सरकार की ओर से लोगों को राहत देने के लिए नगर निगम स्तर पर लगाए गए पट्टा वितरण शिविरों में जारी पट्टों की जांच में गड़बड़ी सामने आई है। जांच में दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर एक ही पते पर पिता-पुत्र के नाम से अलग-अलग पट्टे जारी करवाने और खाली प्लॉटों के नाम पर पट्टे लेने के मामले सामने आए हैं।
दरअसल, शिविरों के दौरान पट्टा जारी करवाने के लिए कई लोगों ने दस्तावेजों में हेरफेर किया। कुछ मामलों में एक ही पते का इस्तेमाल कर पिता और पुत्र दोनों ने अलग-अलग पट्टे जारी करवा लिए। वहीं, जांच के दौरान ऐसे भूखंड भी सामने आए, जहां मौके पर केवल खाली भूखंड मिले। इसके बावजूद उनके नाम पर पट्टे जारी कर दिए गए। जब ऐसे पट्टों की शिकायत आयुक्त के पास पहुंची तो उनकी जांच कराई गई। अब निगम प्रशासन इन मामलों की जांच कर अनियमित तरीके से जारी किए गए पट्टों को निरस्त करने की कार्रवाई कर रहा है।
पट्टा जारी करने से पहले मौके पर भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले दो कनिष्ठ अभियंताओं (जेईएन) की भूमिका भी जांच के घेरे में है। निगम प्रशासन ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इनमें से एक कनिष्ठ अभियंता को अब चार्जशीट थमा दी गई है। ऐसे में पट्टा जारी करने की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच से लेकर मौके पर सत्यापन तक की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पत्रिका की पड़ताल में सामने आया है कि नगर निगम में पिछले लंबे समय से दलाल गिरोह सक्रिय है, जो अधिकारियों के माध्यम से पट्टों की पत्रावलियों को पास कराता है। जितने भी फर्जी पट्टे जारी हुए हैं, वे सभी उसी गिरोह की ओर से जारी कराए गए थे। अब जांच में खुलासा होने के बाद यह भी जरूरी है कि ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों के साथ पट्टे जारी कराने वाले दलालों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए। अकेले जेईएन के स्तर पर फर्जी पट्टे जारी हो जाना भी संभव नहीं है। ऐसे में पटवारी से लेकर प्रत्येक अधिकारी की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
भरतपुर नगर निगम में पहली बार फर्जी पट्टों का मामला सामने नहीं आया है। इस बार भले ही तथ्यों को छिपाकर पट्टे जारी किए गए हैं, लेकिन इससे पहले भी नगर निगम में फर्जी पट्टा घोटाला सामने आ चुका है। एकमात्र राजस्थान पत्रिका ने जून 2023 में नगर निगम के फर्जी पट्टा घोटाले का खुलासा किया था। इसके बाद संविदा कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में दो कर्मचारी निलंबित किए गए थे। साथ ही, फर्जी पट्टा बनवाने वाले एक व्यक्ति और संविदा कर्मचारी को मथुरा गेट थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस प्रकरण में 13 से अधिक एफआईआर दर्ज कराई गई थीं। हालांकि, उस समय हुई जांच में अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई थी।
केस 01:
अटलबंध धाऊ पायसा निवासी अतर सिंह पुत्र बदले सिंह के नाम जारी पट्टे को निरस्त करने की कार्रवाई गत 22 अक्टूबर को की गई। इसकी जांच में पाया गया कि अतर सिंह ने पट्टे के लिए आवेदन के साथ जो दस्तावेज संलग्न किए थे, वे दूसरे मकान के थे। वहीं, जिस स्थान का पट्टा जारी करवाया गया, वहां वर्तमान में खाली भूखंड है, जो खाई और सड़क का हिस्सा है।
केस 02:
नमक कटरा निवासी काशीराम, रतनलाल, भोगीलाल और इंद्रलाल पुत्र चिरंजीलाल के नाम जारी 300 वर्ग गज क्षेत्रफल के स्टेट ग्रांट के तहत पट्टे को निरस्त करने की कार्रवाई 30 अक्टूबर को की गई। पट्टे के लिए जो दस्तावेज संलग्न किए गए थे, वे उनके दूसरे मकान के थे और जिस भूखंड का पट्टा जारी करवाया गया, वहां वर्तमान में नगर निगम का खाली भूखंड है।
शिविरों के दौरान अधिक दबाव होने के चलते पट्टे जारी किए गए। अब आपत्तियों के आधार पर इनकी जांच हो रही है। अब तक 15 फर्जी पट्टे निरस्त किए गए हैं, वहीं 25 पट्टा धारकों को नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही, उस दौरान सत्यापन करने वाले एक जेईएन को चार्जशीट और एक को नोटिस थमाया गया है।
-श्रवण कुमार विश्नोई, आयुक्त, नगर निगम