
Bharatpur : भरतपुर. शहर में मकान बनाने और पुराने भवनों को तोड़ने के बाद निकलने वाला मलबा अब सड़कों के किनारे, खाली भूखंडों और नालों में डालकर ठिकाने लगाना आसान नहीं होगा। निर्माण और ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए भरतपुर में आधुनिक संयंत्र स्थापित किया जाएगा। भरतपुर के अलावा यह प्लांट प्रदेश के भिवाड़ी, भीलवाड़ा, सीकर एवं पाली में बनाए जाने है। खास बात यह है कि इस प्लांट में केवल भरतपुर शहर ही नहीं, बल्कि बयाना से लेकर कामां और डीग तक 12 शहरों-कस्बों से निकलने वाले मलबे का भी निस्तारण होगा। इसके लिए 69,63 टन प्रतिदिन की क्षमता निर्धारित की गई है।
राजस्थान में भरतपुर सहित पांच शहरों में ऐसे संयंत्र लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्वायत्त शासन विभाग की बजट घोषणा 2026-27 के तहत प्रस्तावित इस परियोजना पर प्रत्येक शहर में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पांचों शहरों के लिए कुल 15 करोड़ रुपए की परियोजना तैयार की गई है। इसमें सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग के तहत 1.65 करोड़ रुपए प्रति प्लांट देगी, जबकि शेष 1.35 करोड़ रुपए संबंधित एजेंसी वहन करेगी। चयनित एजेंसी को प्लांट स्थापित करने के साथ अगले 10 साल तक इसका संचालन और रखरखाव भी करना होगा।
योजना की खास बात यह है कि आम नागरिकों को निर्माण मलबा उठवाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। एजेंसी की ओर से 24 घंटे टोल फ्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। इसके जरिए मकान मालिक, निर्माणकर्ता और आवासीय समितियां मलबा उठाने की मांग दर्ज करा सकेंगे। संकरी गलियों और छोटे रास्तों से मलबा उठाने के लिए हाथ ठेले, लोडिंग रिक्शा और छोटे वाहनों की व्यवस्था भी करनी होगी। मलबे का वजन दर्ज करने के लिए प्लांट पर डिजिटल कांटा और वाहनों की निगरानी के लिए जीपीएस व्यवस्था अनिवार्य होगी।
प्लांट में मलबे को मशीनों से कुचलकर और छानकर अलग-अलग आकार की रोड़ी और रेत तैयार की जाएगी। इनका उपयोग सड़क निर्माण में सब-बेस, खाली जगहों के भराव और पेवर ब्लॉक बनाने में किया जा सकेगा। इससे निर्माण सामग्री के लिए प्राकृतिक खनन पर निर्भरता घटेगी और मलबे के कारण होने वाले धूल व प्रदूषण पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
परियोजना के लिए 2 नवंबर से निविदा प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए 12 नवंबर को प्री-विड बैठक होगी, जबकि इच्छुक एजेंसियां दो दिसंबर दोपहर तीन बजे तक ऑनलाइन बोली जमा कर सकेंगी। तकनीकी निविदाएं भी इसी दिन खोली जाएंगी।
भरतपुर सहित सभी 13 निकायों से प्रतिदिन 46.41 टन मलबा निकलने का अनुमान है। इसमें 20 प्रतिशत यानि 9.29 टन अतिरिक्त मलबा थोक मलबा उत्पादकों को ध्यान में रखकर जोड़ा गया। इसके बाद 55.70 टन की मात्रा में भविष्य की जरूरतों के लिए 25 प्रतिशत यानि 13.93 टन अतिरिक्त जोड़ा गया।
1- 69.63 टन प्रतिदिन होगी प्लांट की क्षमता।
2- 3 करोड़ रुपए होगी परियोजना की लागत।
3- 5 शहरों में हैं कुल प्रस्तावित प्लांट।
4- 15 करोड़ रुपए की है कुल परियोजना राशि।
5- 1.65 करोड़ रुपए प्रति प्लांट सरकार का अंशदान।
6- 1.35 करोड़ रुपए प्रति प्लांट एजेंसी का अंशदान।
7- 12 शहर-कस्बे जुड़ेंगे भरतपुर से।
भरतपुर 31.8
डीग 5.65
बयाना 4.85
कुम्हेर 2.95
वैर 2.45
नगर 3.21
भुसावर 25
सीकरी 2.16
रूपवास 2.08
नदबई 3.31
कामां 4.79
उच्चैन 2.83
पहाड़ी 1.05
(नोट: कचरा टन में)
एनसीआर सिटी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह कवायद सरकार के स्तर पर की जा रही है। इसमें मकान और सड़कों के मलबे का साइंटिफिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा।
श्रवण कुमार विश्नोई, आयुक्त नगर निगम, भरतपुर