
Bharatpur Moti Mahal Dispute : भरतपुर राजघराना फिर सुर्खियों में। पूर्व राजपरिवार के मोती महल पर रियासत का ध्वज हटाने व उसके स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने के बाद अब पूर्व राजपरिवार के सदस्य एवं पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज को सभी के लिए सर्वोपरि बताते हुए 21 सितम्बर को जनता से नहीं आने की अपील सोशल मीडिया के माध्यम से की। वहीं पुरातन धरोहर संरक्षण सेवा समिति ने कहा है कि 21 सितम्बर का कार्यक्रम किसी एक संगठन या जाति का नहीं है, बल्कि सभी समाजों का है, जो कि भरतपुर की प्राचीन रियासत के ध्वज को सम्मान मानते हैं। इससे पूर्व गुरुवार को इस झंडे को उतारकर तिरंगा फहरा दिया गया। इसकी जानकारी पूर्व राजपरिवार सदस्य और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह के बेटे अनिरुद्ध सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट करके दी थी। 26 अगस्त को यह विवाद शुरू हुआ था।
पूर्व मंत्री विश्वेंद्र ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि पिछले दिनों मोती महल परिसर में हमारे रियासतकालीन झंडे को बदलकर किसी अन्य झंडे को वहां स्थापित करने की घटना को लेकर सर्वसमाज एवं 36 कौम की सरदारी और कमेटी की ओर से एकजुट होकर विरोध करने के कारण मोती महल परिसर में उस झंडे को बदलकर हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा, जिसका हम समस्त देशवासी सम्मान करते हैं, और तिरंगा हम सभी के लिए सर्वोपरि हैं, उस तिरंगे को मोती महल परिसर में स्थापित कर दिया गया है। मैं आग्रह करता हूं कि 21 सितंबर को भरतपुर आने का कष्ट न करें।
वहीं दूसरी ओर पुरातन धरोहर संरक्षण सेवा समिति के अध्यक्ष दिनेश सिनसिनी ने कहा कि 21 सितम्बर का कार्यक्रम सभी समाजों का है। इसमें शुक्रवार को भी विभिन्न स्थानों पर बैठक हुई हैं। लोगों ने फोन कर कहा है कि 21 सितम्बर को भरतपुर आएंगे। उस दिन जहां लोग एकत्रित होंगे, वहां पर ही सरदारी की ओर से आगामी निर्णय लिया जाएगा।
कुछ दिन पहले पूर्व केबिनेट मंत्री व पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए मोतीमहल पर रियासतकालीन ध्वज हटाकर नया ध्वज लगाए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद सक्रिय हुए संगठनों ने गांव पैंघोर की चामड़ पर महापंचायत कर 21 सितम्बर को खुद ही रियासतकालीन ध्वज लगाने का निर्णय किया था।
राष्ट्रीय ध्वज हमारा सम्मानीय है। उसे लगाने से हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन रियासतकालीन झंडा हमारी पहचान और अस्तित्व है। उस पहचान को हम मिटने नहीं देंगे। वर्ष 1947 में राजतंत्र के बाद जब लोकतंत्र आया था। हमारा रियासतकालीन झंडा जवाहर बुर्ज पर लगा हुआ था। उस झंडे को हटाते समय लोगों ने विरोध किया था। जब यह बात गृह मंत्री व उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल तक पहुंची तो उन्होंने कहा कि भरतपुर राज्य कभी किसी के अधीन नहीं रहा और कोई इसे नहीं जीत पाया है। उनका ध्वज उतारा नहीं जाए और साथ में राष्ट्रीय ध्वज लगाया। प्रशासन से मांग करेंगे कि राष्ट्रीय ध्वज लगाया और साथ में रियासकालीन ध्वज लगाया जाए। हम अब भी रियासतकालीन ध्वज लगाने के लिए तत्पर हैं। जो ध्वज लगाया जाएगा, उसे सभी वृद्धों को दिखाया गया है।
दिनेश सिनसिनी, अध्यक्ष, पुरातन धरोहर संरक्षण सेवा समिति
पूर्व भरतपुर राजपरिवार के सदस्य विश्वेन्द्र सिंह और उनके पुत्र अनिरुद्ध सिंह के बीच संपत्ति को लेकर करीब 4 साल से विवाद चल रहा है। विवाद के बाद विश्वेन्द्र सिंह ने पहले अपना मोती महल छोड़ दिया था और एक फार्म हाउस में रह रहे है, लेकिन उसके बावजूद उनका पुत्र अनिरुद्ध सिंह लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता से संपत्ति विवाद को लेकर पोस्ट करते हैं। पिता-पुत्र के बीच वर्षों से मतभेद है और दोनों के बीच वार्तालाप भी बंद है। पूर्व सांसद दिव्या सिंह भी पुत्र अनिरुद्ध सिंह के साथ हैं।
वर्ष 1985 में राजस्थान में कांग्रेस के मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर थे। वर्ष 1985 में विधानसभा के चुनाव थे। उस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डीग के किले से रियासतकालीन झंडा हटाकर कांग्रेस का झंडा फहरा दिया। जिसके बाद राजा मान सिंह नाराज हो गए। उस वक्त डीग में सीएम शिवचरण माथुर चुनावी सभा के लिए आए थे। बुरी तरह से नाराज राजा मान सिंह ने अपनी जीप से हेलीपेड पर खड़े मुख्यमंत्री के हेलीकाप्टर तोड़ दिया था। इसके बाद एक बार फिर भरतपुर के मोती महल पर रियासतकालीन झंडा हटाने को लेकर विवाद हो रहा है।
नए विवाद के बारे में विश्वेन्द्र सिंह ने अपने फेसबुक पेज के जरिए जनता को बताया था। उन्होंने लिखा कि जिस रियासतकालीन झंडे के लिए हमारे पूर्वजों ने कुर्बानी दी, उस झंडे को पुत्र अनिरुद्ध सिंह ने मोती महल से हटा दिया है। इस जानकारी के बाद सर्व समाज के बैनर तले गांव-गांव में 21 सितम्बर के कार्यक्रम के लिए पंचायत हो रही हैं।