Bharatpur Division Temple: भरतपुर संभाग के 57 मंदिरों में दीपावली पर भेजी गई भोग-प्रसादी में बड़ा घोटाला सामने आया। ठेकेदार ने घटिया व बदबूदार सामग्री भेजी, मिठाई के सैंपल फेल हुए। देवस्थान विभाग ने फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया।
Bharatpur Division Temple Foul Smelling Sweets: भरतपुर: देवस्थान विभाग की ओर से संभाग के आत्मनिर्भर श्रेणी के 57 मंदिरों में दीपावली पर भोग-प्रसादी भेजी गई थी। इसमें भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।
ठेकेदार ने घटिया सामग्री भेजी थी, जो कि जांच में सामग्री के नमूने ही फेल हो गए। अब विभाग ने संबंधित फर्म को जांच में दोषी पाने पर ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2025 को धनतेरस के अवसर पर प्रत्येक मंदिर के लिए 30 किलो मिठाई (पांच प्रकार की), 5 किलो दूध, 5 किलो दही, 2 किलो घी, 5 किलो सरसों का तेल, 1000 मिट्टी के दीपक, 10 पैकेट माचिस, गोवर्धन पर्व के लिए अन्नकूट प्रसादी 200 व्यक्तियों के लिए दौना, पत्तल एवं गिलास के लिए बजट आया था, लेकिन सामान की गुणवत्ता खराब होने के कारण किसी भी मंदिर पर अन्नकूट तक नहीं हो पाया था।
ज्यादातर मंदिरों में 15 किलो मिठाई भेजी गई, जो कि स्थानीय हलवाई की थी। बताते हैं कि दीपावली के अवसर पर मंदिरों की साज-सज्जा, भोग प्रसादी और अन्नकूट के लिए देवस्थान विभाग से रेट कॉन्टेक्ट टेंडर जारी होता है।
प्रत्येक वर्ष की भांति वर्ष 2025 में भी यह जारी हुआ, लेकिन गत वर्षों की अपेक्षा इस बार राज्य सरकार ने राशि बढ़ाई थी। विभाग ने निविदा जारी कर दी। इसके अनुसार मैसर्स चाहर एसोसिएट को टेंडर मिला।
संभाग में देवस्थान विभाग के आत्मनिर्भर श्रेणी के 57 मंदिर हैं। राज्य सरकार से दीपावली पर इनके लिए भोग-प्रसादी के लिए बजट आया जो प्रत्येक मंदिर के लिए 2 लाख रुपए था। संचालक ने इसमें घोटाला कर घटिया प्रसादी मंदिरों में पहुंचाई तो कुछ मंदिरों में तो भोग लगाया गया मगर अधिकांश मंदिर के पुजारियों ने इसकी शिकायत कर दी और प्रसादी लेने से मना कर दिया।
मामला राज्य सरकार तक पहुंचा तो उसने कमेटी गठित कर जांच के आदेश विभाग को दे डाले। जांच में सामने आया कि भोग प्रसादी की गुणवत्ता खराब थी। मंदिरों में प्रसादी पहुंचाने से पहले फर्म को प्रसादी और उसे बनाने में उपयोग होने वाली सामग्री का खाद्य विभाग से गुणवत्ता प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है।
वहीं, प्रसादी देते समय वीडियोग्राफी भी जरूरी है। इसमें मंदिर पुजारी, देवस्थान विभाग के कर्मचारी और फर्म संचालक व कर्मचारी शामिल होते हैं। लेकिन इस फर्म ने ऐसा कुछ नहीं किया और प्रसादी सीधे तौर पर मंदिरों में पहुंचवा दी।
देवस्थान विभाग में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी विभाग में गड़बड़ी व भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि, कार्रवाई के नाम पर विभाग के अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं। पिछले वर्ष 2024 में भी पहली बार सीएम ने देवस्थान के सभी मंदिरों के लिए दीपावली पर इतना बड़ा बजट भेजा था, जिससे मंदिरों के भोग प्रसादी, छप्पन भोग, लाइटिंग हो सके।
लेकिन विभाग के अधिकारियों ने कुछ भी नहीं किया। बल्कि इस साल की तरह घटिया मिठाई और सामान मंदिरों में भेजा। इतना ही नहीं इस साल के प्रकरण को दबाने के लिए विभाग के ही अधिकारी ने पुजारियों को भी चुप कराने की कोशिश की।
जांच में सामने आया कि देवस्थान विभाग के ठेकेदार की ओर से जो 718 रुपए प्रति किलो मूल्य वाले लड्डू, शकरपारे, बालूशाही, मोहनभोग मिठाई मंदिरों में भेजी गई। उसकी कीमत प्रत्येक मंदिर को साढ़े 21 हजार रुपए की थी। इसके नमूने जांच में फेल हुए हैं। मतलब साफ है कि जो मिठाई 200-250 रुपए प्रति किलो में मिल सकती थी, वह 718 रुपए प्रति किलो बताई गई।
प्रसाद बनाने वाली फर्म के खिलाफ शिकायत मिलने पर कार्रवाई की गई। उसकी द्वारा बनाई मिठाई और अन्य सामग्री के सैंपल जांच के लिए भेजे। सैंपल जांच में फेल मिलने पर विभाग ने फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया। उधर, फर्म ने भी भुगतान के लिए विभाग में कोइ बिल जारी नहीं किया।
-मुकेश मीणा, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग