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झुंझुनूं में गैस सिलेंडर के लिए मचा हाहाकार, बुकिंग और DAC नंबर के बाद भी नहीं मिल रहा, एजेंसियों पर मनमानी हावी

LPG Crisis: झुंझुनूं जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर वितरण व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बुकिंग कराने और डीएसी नंबर जारी होने के बावजूद उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा।

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LPG Crisis in Jhunjhunu Consumers Denied Cylinders Despite Booking Black Marketing Allegations Rise

झुंझुनूं में गैस संकट: बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर (फोटो- पत्रिका)

Jhunjhunu LPG crisis: झुंझुनूं जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर वितरण व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है। कागजों में सप्लाई सामान्य बताई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उपभोक्ता सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि बुकिंग और डीएसी नंबर जारी होने के बाद भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहा।

ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई का हाल और खराब है, जिन रूटों पर गाड़ियां भेजी जाती हैं, वे कई बार बीच रास्ते में ही सिलेंडर खाली कर लौट जाती हैं। इससे असली जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंच ही नहीं पाता और वे एजेंसी व गोदाम के चक्कर काटते रह जाते हैं।

बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा हक

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उपभोक्ताओं को गैंस एजेंसी या गोदाम पर सिलेंडर नहीं मिलेगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी उपभोक्ता की बुकिंग भी हो चुकी है और सिलेंडर मिलने का निर्धारित समय शहरी क्षेत्र में 25 और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन हो चुका है।

अगर उस उपभोक्ता का सिलेंडर खाली हो गया और उसके पास ईंधन का अन्य कोई साधन नहीं हैं। उसके क्षेत्र या गांव में सिलेंडर की गाड़ियां नहीं आ रही हैं, अगर वह सिलेंडर लेने के लिए गैस एजेंसी या गोदाम पर जाता है तो उसे सिलेंडर नहीं मिल रहा है। उसे कहा जा रहा है कि उसके क्षेत्र में या गांव में गाड़ी जाएगी, उससे ही सिलेंडर लेना पड़ेगा। जबकि कई गांवों में गाड़ियां पहुंच ही नहीं रही।

ब्लैक में मिल रहे ढाई से तीन हजार रुपए में सिलेंडर

कई उपभोक्ताओं ने अपना नाम बताने से इनकार करते हुए बताया कि गैस सिलेंडर की कालाबाजारी हो रही है। एंजेसियों पर काम करने वाले कर्मचारी अपने जानकारों के जरिए जरूरतमंद उपभोक्ताओं को ढाई से तीन हजार रुपए प्रति सिलेंडर के हिसाब से उपलब्ध करा रहे हैं। सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात तो यह है कि कम-पढ़ें लिखे उपभोक्ताओं की बुकिंग से अपने परिचितों को सिलेंडर दिए जा रहे हैं।

प्रशासन बेअसर, निरीक्षण तक सीमित कार्रवाई

जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर वितरण को लेकर प्रशासन का कोई कंट्रोल नजर नहीं आ रहा। शुरुआती दौर में कुछ निरीक्षण जरूर हुए, लेकिन उसके बाद हालात जस के तस हैं, जिनके पास गैस सिलेंडर के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है, उन्हें चूल्हा जलाना पड़ रहा है।

पर्चियां तक नहीं काट रहे, कटा रहे चक्कर

एंजेसियों पर उपभोक्ताओं को पर्चिया तक नहीं काटकर दी जा रही है। जानकार को पर्ची काट दी जाती है। जबकि अनजान उपभोक्ताओं को आज आना या कल आना कहकर टरका रहे हैं।

केस-1: सिलेंडर खत्म होने पर कुमास पुनियां गांव के उपभोक्ता शिवकरण ने अपना सिलेंडर बुक करा दिया। बुकिंग के बाद डीएसी नंबर भी रीलिज हो गए। गांव में लंबे समय से सिलेंडर सप्लाई के लिए गाडि़या नहीं आ रही हैं।

इस पर उपभोक्ता कनेक्शन की पासबुक लेकर रोड नंबर तीन स्थित गैस एजेंसी पर पहुंचा और वहां पर कार्यरत कर्मचारी को सिलेंडर लेने के लिए पर्ची काटने के लिए कहा। लेकिन कर्मचारी ने उसे पर्ची काटकर देने से मना कर दिया। उपभोक्ता को कहा गया कि आपके गांव में जो गाड़ी जाएगी। वहीं से आप सिलेंडर ले सकते हैं। यहां पर आपको नहीं मिलेगा।

केस-2: उदावास गांव के रोहिताश ने 17 मार्च को सिलेंडर बुक कराया। डीएसी नंबर भी जारी हो गए। जब उपभोक्ता गैस एजेंसी सिलेंडर लेने के लिए पर्ची कटवाने पहुंचा तो कर्मचारियों ने मना कर दिया।

इस पर उसने कहा कि डीएसी नंबर के आधार पर ऑनलाइन पेमेंट कर सिलेंडर ले लेंगे। लेकिन कर्मचारियों ने उसे मना कर दिया कि बिना पर्ची कटे और नकद दिए बिना आपको सिलेंडर नहीं मिलेगा। रोहिताश मन मसोस उल्टे पांव लौट आया।

केस-3: खाजपुर के जितेंद्र ने दिसंबर में सिलेंडर लिया था। इसके बाद उसने सिलेंडर बुक करा दिया। डीएसी नंबर भी जारी हो गए। जब वह शहर के जेके मोदी राउमावि के सामने एजेंसी पर सिलेंडर लेने के लिए पहुंचा तो वहां पर कार्यरत कर्मचारी ने मना कर दिया कि आपके गांव में जब गाड़ी आएगी तभी आपको सिलेंडर मिलेगा।

जब उपभोक्ता ने गांवों में जाने वाली गाड़ी के इंचार्ज लोकेश से फोन पर बात की तो उसने जवाब दिया कि गाड़ियां भेजी थी। लेकिन गाड़ी कुलोद में ही खाली हो गई। आपके यहां पर बाद में आएंगी।

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