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Rajasthan: देश के लिए कारगिल युद्ध में लिया था हिस्सा…13 साल से जंजीर में बांधकर रख रहे घरवाले, रुला देगी ये स्टोरी

Shankar Singh In Kargil War: कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़ने वाले झुंझुनूं के शंकर सिंह आज 27 साल से मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पिछले 13 साल से परिवार उन्हें जंजीरों में बांधकर रखने को मजबूर है।

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Shankar SIngh In Kargil War

शंकर सिंह की फाइल फोटो और वर्तमान स्थिति: पत्रिका

Real Life Emotional Story: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ बलौदा निवासी शंकर सिंह की कहानी बेहद दर्दनाक और सोचने पर मजबूर कर देने वाली है। कारगिल युद्ध में देश की सेवा करने वाले शंकर सिंह पिछले 27 वर्षों से मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं। परिजनों के अनुसार युद्ध से लौटने के बाद उनकी मानसिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य तनाव समझा लेकिन समय के साथ उनका व्यवहार अनियंत्रित होने लगा। हालात इतने खराब हो गए कि बीते 13 साल से परिवार उन्हें जंजीरों में बांधकर रखने को मजबूर है ताकि वे खुद को या दूसरों को नुकसान न पहुंचा सकें।

पत्नी कमोद सिंह का कहना है कि पति के इलाज के लिए परिवार ने अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च कर दी। गांव से लेकर बड़े अस्पतालों तक मदद की गुहार लगाई, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। आर्थिक तंगी के कारण अब परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है। पत्नी का आरोप है कि देश के लिए लड़ने वाले सैनिक की आज तक किसी ने सुध नहीं ली। परिवार ने सरकार से मांग की है कि शंकर सिंह का बेहतर इलाज करवाया जाए और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

जंजीरों में कैद मजबूरी

बीमारी बढ़ने के साथ शंकर सिंह की मानसिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई। परिजनों के अनुसार कई बार उनका व्यवहार इतना अनियंत्रित हो जाता था कि वे खुद को और आसपास के लोगों को नुकसान पहुंचाने लगते थे।

परिवार ने लंबे समय तक उन्हें संभालने और इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। मजबूरी में करीब 13 साल पहले परिवार को उन्हें जंजीरों से बांधकर रखने का कठिन फैसला लेना पड़ा। परिवार का कहना है कि यह फैसला उन्होंने मजबूरी में लिया, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। आज शंकर सिंह खुद से कोई काम नहीं कर पाते और पूरी तरह परिवार पर निर्भर हैं।

पत्नी कमोद सिंह की आंखों में पति की हालत देखकर दर्द साफ नजर आता है। उनका कहना है कि जो इंसान कभी देश की सेवा के लिए सीमा पर खड़ा रहा, आज वही अपने ही घर में बेबस जिंदगी जीने को मजबूर है। कमोद सिंह बताती हैं कि इलाज के लिए उन्होंने हर संभव कोशिश की, लेकिन आर्थिक तंगी और मदद नहीं मिलने से परिवार टूट चुका है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि शंकर सिंह को जल्द किसी अच्छे मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करवाकर उनका बेहतर इलाज कराया जाए, ताकि उन्हें इस दर्दनाक स्थिति से राहत मिल सके।