
निकिता गुर्जर और सोनू भालोठिया. Photo- Patrika
राजस्थान के झुंझुनूं जिले की माटी में ऐसा जज्बा है, जो अभावों से हार नहीं मानता, बल्कि उन्हें हराकर आगे बढ़ता है। विश्व एथलेटिक्स दिवस पर झुंझुनूं की बेटियां इसी जिद और जुनून की मिसाल बनकर सामने आई हैं। न आधुनिक ट्रैक, न पर्याप्त कोचिंग, फिर भी इनके कदम जीत की राह पर थमते नहीं। सीमित संसाधनों के बीच ये खिलाड़ी अपने दम पर जिले का नाम देश-दुनिया में रोशन कर रही हैं ।
जिले में खेल सुविधाओं का अभाव अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है । विश्व स्तरीय सिंथेटिक ट्रैक और प्रशिक्षित कोच की कमी के कारण खिलाड़ियों को हरियाणा के सोनीपत, चूरू सहित अन्य स्थानों का रुख करना पड़ रहा है। इसके बावजूद यहां की बेटियां लगातार पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं ।
बुडानिया की निकिता गुर्जर ने गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय कर नई पहचान बनाई है। पिलानी और चांदकोठी से शुरुआत करने वाली निकिता दुबई, कुवैत और अमरीका में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक सहित राष्ट्रीय व अन्य प्रतियोगिताओं में 10 स्वर्ण समेत कुल 15 पदक जीते हैं । निकिता के अनुसार बेहतर सुविधाएं व कोचिंग मिलती तो वह और बेहतर प्रदर्शन कर सकती थीं ।
पिलानी की सोनू भालोठिया ने संघर्ष के बाद शानदार वापसी कर यह साबित किया कि हौसला सबसे बड़ी ताकत होता है। मिट्टी के ट्रैक से शुरुआत कर उन्होंने खुद को निखारा, लेकिन तकनीकी अभाव के चलते चोटिल हो गईं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लॉन्ग जंप के साथ हेप्टाथलॉन में भी अपनी पहचान बनाई। सोनू अब तक 20 से अधिक पदक जीत चुकी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहरा चुकी हैं।
झुंझुनूं की इन बेटियों ने दिखा दिया कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो केवल बेहतर मैदान, आधुनिक ट्रैक और प्रशिक्षित कोच की, ताकि आने वाले समय में जिले से और अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर नाम रोशन कर सकें।
Published on:
07 May 2026 04:34 pm
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