भरतपुर

Bharatpur : भरतपुर में प्यासी मादा पैंथर को ग्रामीणों ने पीटकर मार डाला, 50-60 व्यक्तियों पर मामला दर्ज

Bharatpur : भरतपुर जिले के सीता गांव में पानी-भोजन की तलाश में आबादी में घुसी मादा पैंथर को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस ने 18 नामजद सहित 50-60 व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
2 min read
• •
Updated: 21 May 2026, 8:46 AM IST
Bharatpur villagers beaten Thirsty female panther death 50-60 persons Case registered
भरतपुर में प्यासी मादा पैंथर। फाइल फोटो पत्रिका

Bharatpur : भरतपुर जिले के सीता गांव में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। गर्मी में पानी और भोजन की तलाश में आबादी में घुसी एक मादा पैंथर को ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और सरियों से पीट-पीटकर मार डाला। इतना ही नहीं, बाद में शव को जलाने की भी कोशिश की गई। पुलिस और वन विभाग की टीम मूकदर्शक बनी देखती रही। मंगलवार रात करीब 10 बजे पैंथर गांव में बनय सिंह के मकान में घुस गया था। सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम पहुंची। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए।

जैसे ही पैंथर बाहर निकला, भीड़ उस पर टूट पड़ी और पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। बाद में उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने शव को जलाने का भी प्रयास किया। टीम ने अधजला शव कब्जे में ले लिया। बुधवार सुबह केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम के बाद शव का निस्तारण किया गया। एसीएफ सुरेश चौधरी ने बताया कि प्रकरण में सीता नाका प्रभारी हरगोविंद शर्मा ने 18 नामजद सहित 50-60 व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

जयपुर में ऐसा हुआ था

गत वर्ष 14 नवंबर को जयपुर के नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के पास गुर्जरघाटी क्षेत्र में आबादी में पहुंचे एक लेपर्ड पर लोगों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल लेपर्ड की अगले दिन मौत हो गई। वन विभाग ने मामला दर्ज किया, लेकिन अब तक आरोपी पकड़ से बाहर है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि विभाग ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

रास्ता मिलता तो निकल जाती

मादा लेपर्ड की उम्र दो साल से कम थी और वह पूरी तरह परिपक्व भी नहीं थी। संभवतः पानी की तलाश में गांव में घुस आई थी। उसे रास्ता मिल जाता तो वह खुद निकल जाती।
चेतन कुमार बीबी, डीएफओ, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

कोशिश की, लेकिन भीड़ उग्र हो गई

पुलिस व वन विभाग की टीम पहुंच गई थी। पैंथर को पकड़ने के लिए भरतपुर से टीम जाल लेकर आ रही थी। इसी बीच पैंथर बाहर निकला और ग्रामीणों ने हमला कर दिया। हमने बचाने की कोशिश की लेकिन भीड़ उग्र हो गई और लेपर्ड को मार दिया। जांच कर रहे हैं।
धीरेंद्र सिंह, एसएचओ, वैर

संघर्ष क्यों! विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे 4 प्रमुख कड़ियां…

वनों का सिकुड़ता दायरा : जंगलों के बीच से सड़कें, रिसॉर्ट्स और खनन गतिविधियों के बढ़ने से तेंदुओं का प्राकृतिक आवास संकट में है।
फूड चेन में असंतुलन : जंगलों में चीतल, सांभर, और जंगली सूअरों जैसे शाकाहारी जीवों की कमी के कारण तेंदुओं को शिकार के लिए आबादी का रुख करना पड़ रहा है।
बाघ की अनुपस्थिति : पारिस्थितिकी तंत्र में कई जगह बाध न होने से तेंदुओं की आबादी पर प्राकृतिक नियंत्रण (अपेक्स रेग्युलेशन) नहीं रह गया है।
आसान भोजन का आकर्षण : शहरों और गांवों के मुहाने पर फेंका जाने वाला कचरा, आवारा कुत्तों और मवेशियों को आकर्षित करता है। ये आवारा जानवर तेंदुओं के लिए 'आसान शिकार' बन जाते हैं।
नतीजा : युवा नर तेंदुए अपनी नई टेरिटरी (इलाका) तलाशने के चक्कर में खेतों, हाइवे और शहरी कॉलोनियों तक पहुंच रहे हैं।

समाधान यह : वन्यजीव के टकराव को रोकने के लिए विशेषज्ञ के सुझाव….

यह शून्य-कचरा प्रबंधन : वन क्षेत्रों से सटे गांवों और रिसॉर्ट्स के आस-पास मांस और कचरे का निपटारा कड़ाई से हो, ताकि आवारा कुत्ते वहां जमा न हों।
सक्रिय कॉरिडोर बहाली : 'वाइल्डलाइफ कॉरिडोर' सुरक्षित किए जाएं।
स्थानीय प्रबंधन : तेंदुओं को बार-बार शिफ्ट करने के बजाय, उनके मूल जंगल में ही पानी के स्रोत और शिकार बढ़ाकर वहीं रोका जाए।
क्विक रिस्पॉन्स टीम : संवेदनशील ब्लॉक स्तर पर ट्रेंड रेस्क्यू टीमें और थर्मल ड्रोन तैनात हों।

Updated on:
21 May 2026, 8:46 AM IST
Published on: