
Bharatpur : डीग में पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ के. के निर्देशन में जिले में साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन काउंटडाउन' के तहत डीग पुलिस द्वारा 9 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। साथ ही 3 नाबालिग को निरुद्ध किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 15 एंड्रॉयड मोबाइल, 14 सिम कार्ड, 3 एटीएम कार्ड, एक क्रेटा और एक स्विफ्ट कार जब्त की है।
पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ ने बताया कि पकड़े गए आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को जाल में फंसाते थे। गिरोह के सदस्य पुराने सिक्के और नोट खरीदने के नाम पर अधिक कीमत दिलाने का लालच देते थे। इसके बाद अलग-अलग शुल्क के नाम पर पीड़ितों से फर्जी बैंक खातों, यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड में ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करवा लेते थे।
पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ ने कहा गिरोह आपत्तिजनक फोटो के जरिए से भी ठगी करता है। आरोपी सोशल मीडिया से संपर्क कर वीडियो कॉल के दौरान आपत्तिजनक वीडियो या स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर लेते थे। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रकम मांगते थे। भय और बदनामी का दबाव बनाकर पीड़ितों से पैसे ऐंठने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ के निर्देशन में डीग जिले में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन काउंटडाउन के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस साइबर ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक खातों और वाहनों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि अनजान सोशल मीडिया प्रोफाइल, वीडियो कॉल, पुराने सिक्के-नोट की खरीद के नाम पर मांगे जाने वाले शुल्क और ऑनलाइन भुगतान के मामलों में सावधानी बरतें।
1- मुनफेद पुत्र जमालुदीन, उम्र 22 वर्ष, निवासी पाली, थाना गोपालगढ़।
2- तौफिक पुत्र जमालुदीन, उम्र 22 वर्ष, निवासी पाली, थाना गोपालगढ़।
3- अब्बास पुत्र नौमान, उम्र 25 वर्ष, निवासी पाली, थाना गोपालगढ़।
4- शाहिद पुत्र नौमान, उम्र 32 वर्ष, निवासी पाली, थाना गोपालगढ़।
5- राशिद पुत्र नौमान, उम्र 35 वर्ष, निवासी पाली, थाना गोपालगढ़।
6- निसार पुत्र अकबर, उम्र 25 वर्ष, निवासी पाली, थाना गोपालगढ़।
7- आकिल पुत्र नसरू, उम्र 19 वर्ष, निवासी पाली, थाना गोपालगढ़।
8- फरहान पुत्र साहुन, उम्र 19 वर्ष, निवासी आरदुका, थाना गोपालगढ़।
9- जैद पुत्र कमरूदीन, उम्र 19 वर्ष, निवासी आरदुका, थाना गोपालगढ़।
इसके अतिरिक्त 03 विधि से संघर्षरत बालकों को नियमानुसार निरुद्ध किया गया।