भरतपुर

Atar Singh Bhadana News : पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना पर हमले के पीछे ये है मुख्य वजह! पढ़े ग्राउंड रिपोर्ट

Bharatpur Crime : भरतपुर. भरतपुर व डीग जिला खनन व्यवसाय के लिहाज से प्रदेश में बड़ा स्थान रखता है। दोनों ही जिलों से करीब 200 करोड़ रुपए से भी अधिक की रॉयल्टी राशि सरकार को जाती है। पढ़े ग्राउंड रिपोर्ट।
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Bharatpur Crime : पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना। फाइल फोटो पत्रिका

Atar Singh Bhadana News : भरतपुर. भरतपुर व डीग जिला खनन व्यवसाय के लिहाज से प्रदेश में बड़ा स्थान रखता है। दोनों ही जिलों से करीब 200 करोड़ रुपए से भी अधिक की रॉयल्टी राशि सरकार को जाती है। लेकिन रास्ते के विवाद को लेकर दोनों ही जिले हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। किसी गांव में लीज को जाने का रास्ता नहीं है तो किसी गांव में गोचर भूमि से रास्ता है तो कहीं नाले की भूमि है तो कहीं सरकारी जमीन से होकर रास्ता है। ऐसे में अक्सर विवादों का सिलसिला चलता रहता है जो कि कभी खत्म होने का नाम नहीं लेता है। बड़ी वजह यह भी है कि ऐसे विवादों का कोई स्थायी समाधान नहीं होता है।

जिम्मेदार विभाग ऐसे विवादों में उलझना नहीं चाहते हैं। इससे यह विवाद बड़ा रूप लेते हैं। गांव भौड़ा में जिस लीज के रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। वह स्थानीय न्यायालय से लेकर हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था, लेकिन पुलिया निर्माण पर स्टे लगा हुआ था। पड़ताल में सामने आया कि खुद पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना जल्द से जल्द काम शुरू कराने पर अड़े हुए थे।

पिछले दो महीने के अंदर वह जिला कलक्टर से लेकर आइजी, एसपी, खनिज विभाग के हरेक अधिकारी से जाकर मिले थे, लेकिन सभी ने उन्हें कोर्ट के आदेश के अनुसार रिकॉर्ड में रास्ते का विवाद निराकरण कराने की बात कही, लेकिन पुलिया निर्माण पर स्टे हटने तक कोई भी प्रक्रिया अमल में लाने से इंकार कर दिया था। पिछले कुछ दिन से उन्होंने लीज चालू करने के लिए रास्ता, मशीनों समेत अन्य काम शुरू कर दिए थे। ऐसे में ग्रामीणों व उनके बीच तनाव के हालात बने हुए थे।

यह है खनन कारोबार का गणित…

डीग जिले में 417 मैशनरी स्टोन की लीज व 72 स्टोन क्रेशर संचालित है। यहां गांव पापड़ा में क्रेशर के रास्ते को लेकर विवाद है। विवाद के कारण उसे बंद करा रखा है। भरतपुर जिले में 75 सैड स्टोन लीज, 70 मैशनरी स्टोन लौज, 77 स्टोन क्रेशर है। यहां भी बयाना में एक लीज को लेकर विवाद आया था, लेकिन बाद में राजीनाम कर शांत करा लिया गया, लेकिन गांव भौड़ा का विवाद लंबे समय से चल रहा था। यह भी सामने आया कि कुछ विवादों में संबंधित लीजों में हिस्सेदारी की लड़ाई भी होती है। कुछ रसूखदार व राजनेता खुद की पार्टनरशिप के लिए दबाव बनाने के लिहाज से कुछ लोगों को आगे कर देते हैं। इससे यह विवाद चलता रहता है। या तो व्यापारी को राजीनामा करना पड़ता है या काम बंद रखकर कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है। कुछ प्रकरणों में रॉयल्टी ठेका शुरू होने के बाद रास्तों के विवाद सामने आते है।

बताते है कि पहाड़ी के मेवात इलाके में आज भी रॉयल्टी ठेकेदार की ओर से रास्तों की बोलियां लगाकर गिरोह को रकम दी जाती है। बयाना एरिया में भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। इतना ही नहीं खुद राजस्व विभाग, खनिज विभाग के अधिकारी ऐसे प्रकरणों में लापरवाही बरतते हैं। क्योंकि लीज आवंटन के समय रास्तों की स्थिति की जांच नहीं की जाती है।

विधायक कोली व सांसद जाटव की चुप्पी!

इस प्रकरण को लेकर सियासी गलियारों में भी एक बात खासी चर्चा का विषय बनी हुई कि आखिर कुछ नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे रखी। वैर से भाजपा के विधायक बहादुर सिंह कोली, यहां से पूर्व में विधायक रहे धौलपुर-करौली से कांग्रेस के सांसद ने इस मामले में कुछ नहीं बोला। जबकि वर्ष 2025 में इसको लेकर पंचायत की गई थी। इसमें वर्तमान धौलपुर-करौली सांसद भजनलाल जाटव, भरतपुर सांसद संजना जाटव ने भी हिस्सा लिया था। जबकि इस मामले को लेकर कांग्रेस के बड़े नेता जहां भाजपा सरकार पर सवाल उठा चुके है तो भाजपा के बड़े नेता पूर्व विधायक की मौत पर शोक व्यक्त कर चुके हैं, लेकिन कुछ नेताओं की चुप्पी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

एक-दूसरे पर मुकदमे

करीब आठ महीने पहले एक फरवरी को भौडागांव निवासी चंदर की शिकायत पर पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना व उनके कर्मचारियों के खिलाफ फायरिंग और मारपीट की एफआइआर दर्ज हुई थी। वहीं 24-25 सितम्बर 2026 को भी पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना ने भी ग्रामीणों के खिलाफ क्रेशर प्लांट पर चोरी करने का मामला दर्ज कराया गया था।

बड़ा सवाल… पुलिस की चूक, लेकिन कार्रवाई के नाम पर जीरो

इस पूरे प्रकरण में भले ही एक-दो दिन में पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी कर वाहवाही लूटने की कोशिश की जाएगी, लेकिन जिन पुलिस अधिकारी ने चूक की है और कानून व्यवस्था बिगड़ने दी है। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होना पुलिस के बड़े अधिकारियों व सरकार पर भी सवाल खड़े कर रहा है। क्योंकि चार दिन से वहां तनाव के हालात बने हुए थे। एक रास्ता ग्रामीणों के कब्जे में था तो दूसरा रास्ता लीजधारक के कब्जे में था। ऐसे में तनाव की स्थिति को नहीं भांपना भी पुलिस की सबसे बड़ी लापरवाही रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार व पुलिस के बड़े अधिकारियों को दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर मिसाल पेश करनी चाहिए थी, लेकिन पिछले कुछ प्रकरणों की तरह इस बार लापरवाहों को ही क्लीन चिट दे दी गई है।

Updated on:
13 Oct 2026 06:35 pm
Published on:
13 Oct 2026 06:35 pm