भरतपुर

Rajasthan : महंगे पेट्रोल-डीजल से बचने का मिला आसान उपाय, भरतपुर में बढ़ा ईवी का क्रेज, मिल रहे 2 फायदे

Bharatpur Increases EV craze : राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की चिंता खत्म। लोगों में ईवी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों से उपभोक्ताओं को 2 बेहद अहम फायदे हो र​हे हैं।

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Rajasthan expensive petrol diesel Solution found Bharatpur EV craze increases 2 benefits
Bharatpur Increases EV craze : फोटो - AI

Rajasthan Electric Vehicles : पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और समय-समय पर ईधन आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितताओं के बीच अब लोगों का भरोसा तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर बढ़ रहा है। कभी भविष्य की तकनीक माने जाने वाले ईवी अब आम लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में अब तक 1832 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हो चुकी है, जिनकी कुल कीमत लगभग 125 करोड़ रुपए से अधिक है।

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान 1181 नए इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर उत्तरे हैं। वहीं वर्ष 2026 शुरुआती छह महीनों में ही 527 ईवी की बिक्री दर्ज की गई हैं। यह आंकड़ा बताता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प

ईवी की बढ़ती संख्या केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) प्रदूषण कम करने में मदद करते हैं और कार्बन उत्सर्जन को घटाने में अहम भूमिका निभाते हैं। शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच ईवी को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन का विकल्प माना जा रहा है।

दोपहिया ईवी की सबसे अधिक मांग

भरतपुर जिले में बिके कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। अब तक 1694 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदे जा चुके हैं। वहीं 138 इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ई-रिक्शा और अन्य व्यावसायिक इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल हैं जो शहर की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।

कम खर्च में अधिक बचत

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते खर्च के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहन कहीं अधिक किफायती साबित हो रहे हैं। जहां पारंपरिक वाहनों में प्रतिदिन ईधन पर अच्छा-खासा खर्च आता है, वहीं ईवी वाहन कम लागत में अधिक दूरी तय कर रहे है। यही वजह है कि नौकरीपेशा लोगों से लेकर व्यापारियों और युवाओं तक में ईवी खरीदने की रुचि बढ़ी है।

सरकारी नीतियों का मिला लाभ

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। चार्जिंग इंफास्ट्रक्चर का विस्तार, करों में रियायत और जागरूकता कार्यक्रमों का भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।

भविष्य की सवारी बन रहे इलेक्ट्रिक वाहन

आने वाले वर्षों में ईवी वाहनों की संख्या और तेजी से बढ़ेगी। बैटरी तकनीक में सुधार, चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार और कम परिचालन लागत के कारण इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य के परिवहन का मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्च से राहत, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के संगम ने इलेक्ट्रिक वाहनों को आम लोगों की पसंद बना दिया है।

जिले में बढ़ रही है इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या

जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोग अब ईवी को एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। इससे न केवल ईंधन पर निर्भरता कम होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
अभय मुद्गल, डीटीओ, भरतपुर

इलेक्ट्रिक वाहन के ग्राहकों की प्रतिक्रिया

ईवी स्कूटर ने खर्चे को कंट्रोल किया

कृष्णा नगर निवासी अनिल चौधरी ने बताया कि पहले हर महीने बाइक में पेट्रोल पर ही 5 से 7 हजार रुपए खर्च हो जाते थे। ईवी स्कूटर लेने के बाद खर्च काफी कम हो गया है। चार्जिंग आसान है और गाड़ी भी बेहतरीन है।

रोजमर्रा के लिए बेहतर ईवी

रणजीत नगर निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया कि दैनिक कार्यों के लिए शहर व आसपास के क्षेत्र में आने- जाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन सबसे बेहतर विकल्प साबित हुआ है। मेंटेनेंस भी कम है और पेट्रोल की चिंता नहीं रहती।

इलेक्ट्रिक वाहन लेने का फैसला सही साबित हुआ

गोपालगढ़ निवासी सतीश अग्रवाल का कहना है कि शुरुआत में संकोच था, लेकिन अब लगता है कि इलेक्ट्रिक कार व स्कूटी लेना सही फैसला था। खर्च में बचत के साथ पर्यावरण के प्रति भी योगदान दे रहे हैं।

Updated on:
16 Jun 2026 01:08 pm
Published on:
16 Jun 2026 01:06 pm