Bharatpur : राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम को इंश्योरेंस मॉडल में चलाने की तैयारी अंतिम चरण में है। भरतपुर के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स बुरी तरह से परेशान हैं। इस एक ही सवाल है कब शुरू होगी RGHS।
Bharatpur : राजस्थान में इलाज की गारंटी देने वाली आरजीएचएस योजना अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। निजी अस्पतालों में मरीजों को धक्के खाने पड़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों को जयपुर जाना पड़ता है तो वहां भी निजी संचालकों ने इलाज से मना कर दिया है। ऐसे में पेंशनर्स को खासी परेशानी हो रही है।
हालांकि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम को इंश्योरेंस मॉडल में चलाने की तैयारी अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को इस बदलाव के लिए हरी झंडी दे दी है। सरकार का लक्ष्य है कि जल्द ही नया मॉडल लागू कर दिया जाए। यह बदलाव राज्य की मां योजना के सफल मॉडल से प्रेरित है। जहां बीमा कंपनी के जरिए क्लेम और भुगतान प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुचारू रूप से संचालित हो रही है।
इस योजना से भरतपुर जिले के 58 हजार 389 पेंशनर्स अस्पताल जुड़े हुए है। विभाग का दावा है कि इंश्योरेंस मोड लागू होने के बाद आरजीएचएस में भी अस्पतालों और लाभार्थियों को भुगतान संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी और इलाज की सुविधा निर्बाध हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि भुगतान विवाद के चलते प्रदेशभर में अधिकांश निजी अस्पतालों ने आरजीएचएस योजना में मरीजों का इलाज बंद किया हुआ है, जिससे मरीजों को निजी खर्च पर इलाज कराना पड़ रहा है। प्रदेश में करीब 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स के परिवारों के 50 लाख सदस्य आरजीएचएस से जुड़े हैं।
लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के परिवारों के 50 लाख सदस्य जुड़े हैं, जिन पर सरकार सालाना 4 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। वहीं मां योजना में करीब सात करोड़ लोगों को कवर किया जाता है। इस पर करीब 3500 करोड़ रुपए का व्यय होता है। कम लाभार्थियों के बावजूद आरजीएचएस पर अधिक खर्च सरकार के लिए वित्तीय दबाव का कारण बना हुआ है।
आरजीएचएस के तहत 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स के परिवारों के 50 लाख सदस्य आरजीएचएस से जुड़े हैं। जिन पर सरकार सालाना 4 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। वहीं मां योजना में करीब सात करोड़ लोगों को कवर किया जाता है। इस पर करीब 3500 करोड़ रुपए का व्यय होता है। कम लाभार्थियों के बावजूद आरजीएचएस पर अधिक खर्च सरकार के लिए वित्तीय दबाव का कारण बना हुआ है।
चिकित्सा विभाग का दावा है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद पेंशनर्स और मरीज परेशान हैं, जिससे स्पष्ट है कि आरजीएचएस योजना का मौजूदा स्ट्रक्चर सही नहीं है। वहीं चिकित्सा मंत्री का कहना है कि हम कोशिश कर रहे हैं कि इस महीने के अंत तक या अगले महीने तक इसे इंश्योरेंस लागू कर दिया जाए। सरकार नई व्यवस्था लागू करने से पहले कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स को विश्वास में लेने की रणनीति पर काम कर रही है। ताकि पैकेट रेट, इलाज की सीमा और क्लेम प्रक्रियाओं को लेकर उनकी आशंकाएं दूर की जा सकें।
पिछले काफी समय से जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन देकर योजना को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। ताकि पेंशनर्स व सरकारी कर्मचारी व उनके परिजनों को योजना का लाभ मिल सके।
डोरीलाल शर्मा, अध्यक्ष पेंशनर्स समाज