भरतपुर

Bharatpur : रीट 2018 के 372 पदों पर जंग तेज: आमरण अनशन कर रहे 3 अभ्यर्थी अस्पताल में भर्ती, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

Bharatpur : भरतपुर के बयाना में रीट भर्ती 2018 में एमबीसी वर्ग के लंबित 372 पदों को लेकर चल रहा आंदोलन अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार शाम से दोबारा आंदोलन शुरू हुआ। आमरण अनशन कर रहे तीन अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जानें फिर क्या हुआ?

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बयाना. अस्पताल में उपचार के दौरान भर्ती आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थी। फोटो पत्रिका

Bharatpur : भरतपुर के बयाना में रीट भर्ती 2018 में एमबीसी वर्ग के लंबित 372 पदों को लेकर चल रहा आंदोलन अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हिण्डौन रोड स्थित कारबारी-पीलूपुरा स्मारक स्थल पर आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सोमवार दोपहर अचानक तीन अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार अनशन पर बैठे राजवीर (बड़ागांव), अरुण (तिघरिया) और रणवीर (डीग) को शुगर लेवल गिरने, तेज कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत हुई।

मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने प्राथमिक जांच के बाद स्थिति गंभीर पाई और तत्काल तीनों को बयाना उपजिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां उपचार के दौरान ड्रिप चढ़ाई गई, लेकिन हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। पुलिस और प्रशासन इस वक्त अलर्ट मोड़ में है। आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों को मानने की भरसक कोशिश की जा रही है।

घटना के बाद प्रशासन में भी हलचल तेज

घटना के बाद प्रशासन में भी हलचल तेज हो गई। एसडीएम दीपक मित्तल, एडिशनल एसपी हरिराम कुमावत और कोतवाली थाना प्रभारी रामगिलास गुर्जर तुरंत धरना स्थल पर पहुंचे और अभ्यर्थियों से बातचीत कर समझाइश दी। बावजूद इसके अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अडिग रहे और स्पष्ट कहा कि नियुक्ति आदेश जारी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

शनिवार शाम से दोबारा शुरू हुआ आंदोलन

गौरतलब है कि एमबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों ने शनिवार शाम से दोबारा आंदोलन शुरू किया था, जिसमें तीन अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं। इस आंदोलन को अब गुर्जर समाज का खुला समर्थन भी मिलने लगा है, जिससे स्थिति और संवेदनशील होती जा रही है। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

1 मई तक समाधान का मिला था आश्वासन, पर समस्या का नहीं हुआ हल

उल्लेखनीय है कि 8 अप्रैल को कलेक्ट्रेट सभागार में प्रशासन, समाज प्रतिनिधियों और अभ्यर्थियों के बीच हुई बैठक में 1 मई तक समाधान का आश्वासन दिया गया था। लेकिन समय सीमा बीतने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी है। अब यह आंदोलन निर्णायक दौर में प्रवेश करता दिख रहा है, जहां किसी भी समय हालात और बिगड़ सकते हैं।

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Published on:
05 May 2026 01:48 pm
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