
भरतपुर. चम्बल परियोजना की लेटलतीफी के चलते गांवों की प्यास बड़ी होती जा रही है। दावों के बीच जमीनी हकीकत अभी प्यास बुझाती नजर आ रही है। गांवों में कई जगह बंद पड़े काम के चलते एक कंपनी ने काम करने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि विभागीय दावे काम की रफ्तार बढऩे की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत में काम रफ्तार पकड़ता नजर नहीं आ रहा है। इसी का नतीजा है कि यह परियोजना लेटलतीफी की भेंट चढ़ी हुई है।
परियोजना के काम से जुड़ी सूर्यदीप कंपनी के काम नहीं करने पर उसकी जगह जीए कंपनी से काम कराने की बात सामने आई। इसके लिए जीए कंपनी की ओर से मैटेरियल का रिकंसलेशन किया जाना था, लेकिन ठेकेदारों के बकाया चल रहे भुगतान के चलते ठेकेदार ने कंपनी को यह काम नहीं करने दिया। इसके बाद कंपनी को यह बात समझ आ गई कि ठेकेदारों करीब डेढ़ करोड़ का भुगतान बकाया है। उसे पहले यह राशि देनी होगी। साथ ही कंपनी ने गांवों में रुके पड़े कार्यों का आंकलन किया तो भी स्थिति ठीक नजर नहीं आई। ऐसे में कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। हालांकि सूर्यदीप कंपनी अभी भी काम करने की इच्छुक है, लेकिन प्रतिभा की ओर से उसे काम नहीं करने दिया जा रहा है। प्रतिभा के पास अभी भी सूर्यदीप कंपनी के 70 लाख रुपए बकाय बताए जा रहे हैं। कंपनियों पर ठेकेदारों के वर्ष 2015-16 से भुगतान बकाया चल रहा है, लेकिन अभी तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली है। सूर्यदीप कंपनी के हटने पर जीए को कुम्हेर एवं भरतपुर ब्लॉक के ऐसे काम दिए जाने थे, जो प्रतिभा कंपनी के पास हैं, जबकि जीए को गांवों में पिछड़े काम की स्थिति का पता चला तो उसने फिलहाल काम करने से इनकार कर दिया है। इन गांवों में जो काम प्रतिभा कंपनी के पास है, वह अब तक रुका पड़ा है।
ठेकेदारों का ऐतराज, फिर भी कर दिया भुगतान
चम्बल परियोजना से जुड़ी कंपनियों ने ठेकेदारों से काम तो करा लिया, लेकिन उनका भुगतान अभी तक अटका पड़ा। पूर्व में जिला कलक्टर के साथ भी ठेकेदार, अधिकारी एवं कंपनी प्रतिनिधियों की वार्ता हो चुकी है। इसके बाद भी उनका भुगतान नहीं हो सका है। खास बात यह है कि ठेकेदारों के ऐतराज के बाद भी विभाग ने एक कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। इससे ठेकेदारों में भुगतान को लेकर रोष है।
अभी नोटिस जारी नहीं होने के बाद छिपा है राज
बताते हैं कि राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग की ओर से जिला प्रशासन को निर्देश दिए जा चुके हैं कि काम नहीं करने वाली कंपनी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन पांच दिन गुजर जाने के बाद अभी तक नोटिस तक जारी नहीं हो सका है। ऐसे में सूत्रों की मानें तो कंपनी को रसूख के दबाव में बचाने की कोशिश की जा रही है। इसमें पीएचईडी के अफसरों से लेकर तमाम वो अफसर भी शामिल हैं, जिन पर जिले में इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने या कहीं न कहीं सहभागिता जुड़ी हुई है।