भिलाई

बैंक ने खुद गलती की और किसानों को लाभ भी नहीं दिया, अब भुगतो, क्या है मामला, पढ़ें खबर

जिला उपभोक्ता फोरम ने फरवरी 2018 में 105 प्रकरणों पर उतई क्षेत्र के 11 किसानों के परिवाद पर फैसला सुनाया।
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Feb 28, 2018
Durg forum

दुर्ग . जिला उपभोक्ता फोरम ने फरवरी 2018 में 105 प्रकरणों पर फैसला सुनाकर एक रिकार्ड बनाया है। माह के अंतिम दिन बुधवार को फोरम ने उतई क्षेत्र के ११ किसानों के परिवाद पर फैसला सुनाया। फैसले में वृहत्ताकार सहकारी समिति मर्यादित उतई और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। फोरम ने आदेश दिया है कि दोनों को संयुक्त रुप से एक लाख ६८ हजार ४५६ रुपए एक माह के भीतर परिवादी किसानों को अदा करें। इस राशि में ५८ हजार ४५६ बीमा का, ५५ हजार मानसिक कष्ट और ५५ हजार रुपए वाद व्यय का शामिल है।

खरीफ व रबी फसल का बीमा
परिवाद के मुताबिक शासन ने वर्ष २०१५-१६ के खरीफ व रबी फसल के लिए बीमा किया था। प्रीमियम राशि प्रत्येक किसान क्रेडिट कार्डधारी कृषकों से लिया गया था। सेवा सहकारी समिति से प्रीमियम राशि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के माध्यम से भारतीय कृषि बीमा कंपनी के खाते में स्थानंतरण किया गया था। खास बात यह है कि प्रीमियम जमा होने के बाद ११ किसानों को फसल क्षति होने का दावा के बाद पर बीमा का लाभ नहीं मिला। किसानों ने बीमा का लाभ लेने पहले अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजा। किसी तरह की सुनवाई नहीं होने पर परिवाद प्रस्तुत किया गया था।

बैंक ने यह की थी गलती

शासन ने फसल क्षति देने सर्वे कराया था। सर्वे के आधार पर पटवारी हल्का नंबर ४० पुरई के किसानों का लाभ मिलना था। परिवादी किसानों का खेत भी इसी पटवारी हल्का नबंर में है, लेकिन बैंक ने प्रीमियम जमा करते समय किसानों का पटवारी हल्का नंबर ४२ उतई का उल्लेख कर दिया था। इस वजह से किसानों का लाभ नहीं मिला।

फोरम का निष्कर्ष
जब शासन प्रत्येक ऋणी किसानों का फसल बीमा करता है तो किसानों का इसका अनिवार्य रुप से लाभ मिलना चाहिए। किसान बीमा के बाद यह सोचता है कि अगर फसल खराब हो गई तो उसे बीमा का लाभ मिलेगा। योजना का लाभ मिलने से उसके आर्थिक स्थिति पर अधिक मार नहीं पड़ेगी। क्षति होने से भरपाई हो जाएगी, लेकिन बैंक की गलती के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिला।

Updated on:
28 Feb 2018 09:32 pm
Published on:
28 Feb 2018 09:32 pm