भिलाई

…तो इसलिए एकाएक गड्ढों से पट गया ये शहर, कारण जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

मटेरियल की जांच के लिए खरीदी गई लाखों के उपकरण कबाड़ हो गए हैं। कमरे में बंद उपकरणों पर धूल की मोटी परत जमी हुई है।

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Aug 02, 2018
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भिलाई . शहर की सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं है। डामर व गिट्टी के उखडऩे से सड़कों में गड्ढों की भरमार हो गई है। इसकी वजह यह है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता पर जरा भी ध्यान नहीं है। निर्माण सामग्री जांचने के लिए बनाए निगम के प्रयोगशाला में ताला लटका हुआ है।

मटेरियल की जांच के लिए खरीदी गई लाखों के उपकरण कबाड़ हो गए हैं। कमरे में बंद उपकरणों पर धूल की मोटी परत जमी हुई है। वहां न तो मटेरियल की जांच हो रही है न रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बिना जांच के बनाए सड़कें छह माह भी नहीं टिक रही है।

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24 लाख का है निगम का प्रयोगशाला
वर्ष २०१३-१४ में निगम ने लगभग १० लाख रुपए खर्च कर प्रयोगशाला भवन बनाया गया। मटेरियल की जांच के लिए १४ लाख रुपए में उपकरणों की खरीदी कर एक सेटअप तैयार किया। कांक्रीट, ईंट, गिटटी, रेत के मिश्रण की जांच के लिए मशीन और उपकरण भी खरीदी गई।

भवन में सेटअप तैयार कर तात्कालीन महापौर निर्मला यादव ने लोकार्पण किया। तब यह दावा किया गया था कि अब सड़क, नाली व भवन निर्माण का काम गुणवत्ता के साथ होगा। प्रयोगशाला में मेटेयिल की पहले जांच होगी। तब एक सीसी रोड के सैंपल की जांच की गई। इसके बाद निगम के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

जनप्रतिनिधियों ने भी नहीं दिया ध्यान
कलेक्टर उमेश अग्रवाल ने 2016 में प्रयोगशाला के उपकरणों पर धूल की मोटी परत देख नाराजगी जताई थी। निगम आयुक्त को प्रयोगशाला को चालू करने और शासन को तकनीशियन की नियुक्ति के लिए पत्र लिखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी निगम प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। इस वजह से मशीन व उपकरण खराब हो गए।

दो सब इंजीनियरों ने लिया था प्रशिक्षण
देवेन्द्र यादव ने महापौर पद की शपथ लेने के बाद जनवरी 2016 में प्रयोगशाला भवन का जायजा लिया। तब उन्होंने अधिकारियों को प्रयोगशाला को चालू करने के लिए दो सब इंजीनियर की ड्यूटी लगवाई। उन्हें प्रशिक्षण के लिए रायपुर भेजा। प्रशिक्षण लेने के बाद दोनों सब इंजीनियर नौकरी छोड़कर चले गए।

बड़ा सवाल आखिर क्यों नहीं कराते जांच
डामरीकृत और सीसी रोड की क्वॉलिटी, नाली का थिकनेस, नाली और ईंट की क्वालिटी को लेकर लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बाद भी इंजीनियर निर्माण में प्रयोग किए जाने वाले बिल्डिंग मटेरियल की जांच नहीं कराते।

प्रयोगशाला में सड़क निर्माण के समय मुरूम की क्वॉलिटी, गिट्टी के साइज और क्वॉलिटी, कांक्रीट में रेत और सीमेंट की जांच, निजी शौचालयों सहित अन्य निर्माण कार्य में लगने वाली ईट व सीमेंट की प्लेटों की गुणवत्ता जांच करने की सुविधा है। पेवर ब्लाक की टेस्टिंग किया जा सकता है। अध्यक्ष लोककर्म विभाग ननि नीरज पाल ने बताया कि तकनीकी स्टॉफ की कमी के कारण लैब को चालू नहीं रख पा रहे हैं। इसे चालू रखने के लिए नई व्यवस्था शुरू की जाएगी।

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Published on:
02 Aug 2018 01:58 pm
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