
BSP Scrap Theft Case: बीएसपी के लौह स्क्रैप चोरी मामले में सीबीआई जांच के आदेश के बाद पुलिस ने अब तक जुटाए दस्तावेज और साक्ष्य केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। मामले में पुलिस अब तक 21 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि कुछ आरोपियों ने अग्रिम जमानत ली है। सीबीआई जांच में मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
भिलाई-3 थाना पुलिस ने 26 मई को ग्राम अकलोरडीह स्थित एके ट्रेडर्स में छापा मारकर चोरी का 250 टन बीएसपी स्क्रैप (प्लेट-ब्लूम), 14 वाहन और हाइवा, क्रेन, बैकहो लोडर, चेन माउंटेन समेत मशीनरी जब्त की थी। जब्त सामग्री की कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपए बताई गई थी। पुलिस ने चोरी, परिवहन और स्क्रैप खरीद से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की। अब पुलिस 900 पेज का चालान, केस डायरी, जब्ती दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सीबीआई को सौंपने की तैयारी में है। सीबीआई की ओर से रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद केस से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे।
सीबीआई की जांच में बीएसपी के स्टॉक रजिस्टर, गेट पास, वे-ब्रिज रिकॉर्ड, सुरक्षा दस्तावेज और स्क्रैप से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। चोरी के स्क्रैप की निकासी, परिवहन, बिक्री और खरीद की पूरी कड़ी की पड़ताल भी संभावित है।
सीबीआई जांच के आदेश के बाद स्क्रैप कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल बढ़ गई है। स्क्रैप के मकडज़ाल में उलझे कई रसूखदार और सफेदपोश रायपुर में केस को सुलझाने के लिए भटक रहे हैं। पुलिस जांच में सामने नहीं आए लोगों की भूमिका भी अब सीबीआई की पड़ताल के दायरे में आ सकती है। वहीं, कुछ आरोपियों द्वारा अग्रिम जमानत लिए जाने के बाद जांच एजेंसी के सामने मामले की पूरी कड़ी और कथित नेटवर्क की पड़ताल अहम होगी। नार्को टेस्ट जैसी जांच कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर ही संभव होगी।
जांच के दौरान नए तथ्य या साक्ष्य मिलने पर अन्य संदिग्धों से पूछताछ हो सकती है। संयंत्र या संबंधित विभाग के किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी की भूमिका सामने आने पर उसे भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है। दूसरे राज्यों से जुड़े खरीदार, कारोबारी या वित्तीय लेन-देन सामने आने पर जांच का दायरा वहां तक बढ़ सकता है।