घर के किचन का खर्च, बच्चों की फीस, बाहर के खर्च इन सब के बीच परिवार के लिए सेविंग कुछ भी नहीं। कुछ ऐसा ही हाल एक मिडिल क्लास फैमिली का होगा।
भिलाई. घर के किचन का खर्च, बच्चों की फीस, बाहर के खर्च इन सब के बीच परिवार के लिए सेविंग कुछ भी नहीं। कुछ ऐसा ही हाल एक मिडिल क्लास फैमिली का होगा। एनडीए सरकार के इस बजट ने मिडिल क्लास फैमिली को कुछ भी राहत नहीं दी। सेक्टर 1 निवासी बाकलीवाल परिवार में बजट को लेकर सभी की सोच एक सी है। आम आदमी के लिए यह बजट खर्च बढ़ाने वाला है।
बचत करें या घर चलाएं
महिलाओं के लिए यह बजट काफी मुश्किलें लेकर आ रहा है। कामकाजी महिलाएं हो या बिजनेस वुमन या हाउसवाइफ फर्क सभी को पड़ेगा। रोजमर्रा की जरूरत का सामान ही जब महंगा हो गया और हर बिल पर टैक्स देना पड़ेगा तो बचत के बारे में वे सोच भी नहीं सकतीं।शिक्षा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी सेस के माध्यम से 1 प्रतिशत टैक्स बढ़ाया गया है। इसका सीधा असर घर के बजट पर भी पड़ेगा।
रोजगार की कतार में 4 लाख बेरोजगार
बजट में सरकार ने 70 लाख नौकरियां देने का वादा किया है। वैसे ये कोई नई बात नहीं है, क्योंकि पिछले बजट में यह आंकड़ा दो करोड़ के आसपास था। यानि इस बजट में नौकरियों की बड़े पैमाने पर कटौती। खास बात यह भी अकेले दुर्ग जिले में ही चार लाख से अधिक शिक्षित बेरोजगार हैं, जिन्हें अब तक मौका नहीं मिल पाया। प्रदेश में बेरोजगारों का ग्राफ १९ लाख के आसपास हैं। इस आम बजट ने नौकरियों के मामले में तो युवाओं को खासा नाराज किया है।
उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा बजट
आम बजट को लेकर शहर के सीए भी बेबाकी से बोले। केंद्र सरकार ने इस बार फिर लॉन्गटर्म बजट पेश किया, जबकि धरातल से दूर हो गए। यह उम्मीद पर खरा बजट नहीं लगता। हर उद्योग को पहले से ही सिम नंबर दिया जाता है। पैन भी अनिवार्य है। अब यह समझ से बाहर है कि आखिर सरकार आधार जैसा एक और नंबर उद्योगों पर क्यों थोंपना चाहती है। इस बजट को देखकर ऐसा लगता है जैसे सरकार पीएसयू, आम आदमी और मूलभूत सुविधाओं को छोड़कर व्यापारी हो गई है।
सीए पीयूष जैन, उपाध्यक्ष, आईसीएआई भिलाई ने बताया कि उम्मीद थी कि ८०सी में बदलाव होंगे, पर इस पर भी पानी फिर गया। इसी तरह २५० करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी को ५ फीसदी की छूट दी गई, लेकिन पार्टनरशिप या अन्य व्यवसाय में टैक्स ३० फीसदी ही देना होगा, ये किसी भेदभाव से कम नहीं।
राजेश बाफना, सीए ने बताया कि सरकार ने अधिक नौकरियां सृजित करने पर ध्यान न देकर युवाओं को स्टार्टअप की दिशा दिखाई है। मुद्रा में ३ लाख करोड़ के प्रोजेक्ट से छोटे व्यापारियों को यकीनन फायदा मिलेगा। बशर्ते सरकार मुद्रा योजना की निगरानी भी करे, सिर्फ पैसा बांटकर भूल जाना सही नहीं होगा।
पदम बरडिय़ा, सीए ने बताया कि बजट में प्रासीक्यूशन और पैनाल्टी सिर्फ करदाता पर लगाने का प्रावधान कर दिया गया है। इससे अधिकारियों को जो असीमित अधिकार मिलेगा। लालफीता शाही एक बार फिर लौटेगी। उम्मीद थी लापरवाही की स्थिति में अधिकारियों पर भी पैनाल्टी लगेगी, लेकिन बजट में इसे नकार दिया गया।