Budget 2025-26: कोष भले ही खाली है और कर्मचारियों के वेतन देना मुश्किल होता है, लेकिन नगर निगम में इस बार भी लाभ का बजट पेश किया जाएगा।
Budget 2025-26: कोष भले ही खाली है और कर्मचारियों के वेतन देना मुश्किल होता है, लेकिन नगर निगम में इस बार भी लाभ का बजट पेश किया जाएगा। महापौर नीरज पाल 27 मार्च को वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगे। यह बजट 14,610 लाख रुपए लाभ का होगा।
इसके पहले बजट पर गुरुवार को एमआईसी में चर्चा हुई। कुछ सुझाव व आंशिक संशोधन करने के प्रस्ताव के साथ एमआईसी ने बजट को मंजूर कर दिया। अब बजट सामान्यसभा में पेश किया जाएगा। निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय ने गुरुवार को एमआईसी में बजट का मसौदा रखा। बैठक में बजट को लेकर करीब सवा 3 घंटे तक चर्चा चली। बजट को पढ़कर एमआईसी सदस्यों को बताया गया।
बजट में साफ है कि नगर निगम, भिलाई की आय 43,155.60 लाख रुपए है। वहीं खर्च 51,341.95 लाख सालाना है। इस तरह 8186.35 लाख रुपए घाटा होता है, लेकिन प्रारंभिक शिलक में 22,797.33 लाख रुपए पहले से है जिसका योग 65,952.93 लाख हो जाता है और इस तरह लाभ का बजट बनाया गया है।
बजट में राज्य सरकार से काफी उमीदें रखी गई है। बजट में शहर का विकास राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान पर निर्भर होगा। शासन से दान अनुदान केे रुपए में 24275.71 लाख रुपए मिलने का अनुमान लगाया गया है।
नगर निगम पिछले तीन साल से लाभ का बजट पेश कर रहा है। निगम की जितनी आय नहीं है, उससे अधिक खर्च कर दिया जाता है। ऐसे में कर्मियों को देने के लिए वेतन तक नहीं होता। प्रॉपर्टी टैक्स एकत्र करने निगम ने निजी कंपनी को हायर किया है। वह काम को 100 फीसदी अंजाम तक नहीं पहुंचा रही है। बैठक की अध्यक्षता महापौर नीरज पाल ने की।
बैठक में महापौर परिषद के सदस्य सीजू एंथोनी, लक्ष्मीपति राजू, केशव चौबे, संदीप निरंकारी, साकेत चंद्राकर, लालचंद वर्मा, आदित्य सिंह, मन्नान गफार खान, नेहा साहू, मालती ठाकुर, चंद्रशेखर गवई, निगम के लेखाधिकारी चंद्रभूषण साहू, जोन आयुक्त अजय सिंह राजपूत, येशा लहरे, कुलदीप गुप्ता, कार्यपालन अभियंता अखिलेश चंद्राकर, अनिल सिंह, रवि सिन्हा, संजय अग्रवाल, अरविंद शर्मा जनसंपर्क अधिकारी अजय शुक्ला मौजूद थे।
बैठक में महापौर और आयुक्त ने पार्षदों से कहा कि वे अपने क्षेत्र के बड़े प्रस्ताव दें, ताकि उसे बजट में जोड़ा जा सके। खुर्सीपार जोन अध्यक्ष भूपेंद्र यादव ने वार्ड के विकास कार्य के प्रस्ताव रखा। एमआईसी सदस्य चंद्रशेखर गवई ने गदा चौक को लेकर प्रस्ताव दिया कि इसको विकसित कर राजेंद्र प्रसाद चौक के नाम से ही इसे जाना जाए।
संचित निधि 375 लाख
विधि के आदेशों, प्राप्त समस्त धन 3884 लाख
संपत्ति से आय 1533.61 लाख
निगम संपत्ति से भाड़ा व भूभाटक 2869 लाख
कर से एकत्र धन 5813 लाख
शुल्क की वसूली से एकत्र धन 2449.97 लाख
न्यायालय से आरोपित समस्त अर्थदंड 435 लाख
क्षतिपूर्ति, अपराधों के समझौता की आय 228.58 लाख
अनुदान, दान, धरोहर, शासन से प्राप्त धन 24275.71 लाख
ब्याज व लाभ 930 लाख
अन्य प्राप्तियां 730.15 लाख
महायोग 43155.60 लाख
कार्यालयीन व्यय 418 लाख
वाहन विभाग 1635 लाख
मार्ग प्रकाश व्यवस्था 1665 लाख
लोक स्वास्थ्य सुविधाएं 5390 लाख
स्वच्छता, जन स्वास्थ्य 6545 लाख
पर्यावरण संरक्षण 50 लाख
उद्यानों के सौंदर्यीकरण 179 लाख
भवन निर्माण 420 लाख
दूषित जल निकासी 90 लाख
सड़क निर्माण, संधारण 160 लाख
महायोग 51341 लाख
प्रारंभिक शिलक 22797.33 लाख
आय 43155.60 लाख
योग 65952.93 लाख
व्यय 51341.95 लाख
अंतिम शिलक 14610.98 लाख