
भिलाई. छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ने संबद्ध संस्थानों को शैक्षणिक सत्र २०१८-१९ का एफिलेशन देने अधिसूचना जारी की है। संस्थानों से नए कोर्स का संचालन, सीट वृद्धि, वर्तमान कोर्स सहित नए संस्थान शुरू करने संबद्धता के लिए ३१ दिसंबर की तिथि निर्धारित की है।
तय फीस के साथ दिए गए फॉर्मेट में संस्थानों को अप्लाई करना होगा। संस्थानों द्वारा दिए गए दस्तावेज का सुक्ष्म परीक्षण करने के बाद संबद्धता जारी की जाएगी। इसके बाद विश्वविद्यालय एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में प्रस्ताव रखे जाएंगे। विवि प्रशासन के मुताबिक पूर्व में जिन संस्थानों के विरुद्ध मामले सामने आ चुके हैं, उन्हें संबद्धता जारी करने का निर्णय सबसे अहम होगा।
इसी तरह नया इनटेक व नए संस्थानों को संबद्धता दिए जाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। जानकारी के मुताबिक जनवरी के दूसरे हफ्ते में होने वाली एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में संबद्धता को लेकर जरूरी निर्णय लिए जा सकते हैं।
एआईसीटीई का अप्रूवल
संस्थाओं को संबद्धता जारी करने के लिए एआईसीटीई की मंजूरी भी जरूरी होगी। एआईसीटीई के नॉम्स के तहत नए संस्थान व नए इनटेक को मान्यता नहीं मिलने की स्थिति में संबद्धता रोकी जा सकती है। ऐसे संस्थानों को छत्तीसगढ़ शासन सहित विभिन्न चरणों में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) भी लेना होगा। एग्जीक्यूटिव काउंसिल, एआईसीटीई और राज्य शासन के अप्रूवल के बाद ही इनटेक, सीट वृद्धि सहित तमाम फैसले होंगे।
चार कॉलेजों की मान्यता पर संशय
चार इंजीनियरिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर संशय की स्थिति बनती दिख रही है। हाल ही में एआईसीटीई के औचक निरीक्षण के दौरान कॉलेजों में भारी गड़बड़ मिली है। परिषद ने इन्हें हेयरिंग के लिए बुलाया था, जिसका फैसला जनवरी तक आने की उम्मी है। इनमें से दो कॉलेज ऐसे हैं, जिनकी छात्र संख्या ३० फीसदी से कम है।
परिषद ने पहले ही कह दिया है कि जिन कॉलेजों में पांच साल की स्थिति में छात्र संख्या कम पाई जाएगी, उन्हें बंद किया जा सकता है। यही वजह है कि सीएसवीटीयू से संबद्ध कई संस्थान इसके दायरे में आ जाएंगे। हालांकि मान्यता या ब्रांच बंद करने को लेकर परिषद ने अभी कोई भी अधिसूचना जारी नहीं की है।
डीएन सिरसांत रजिस्ट्रार सीएसवीटीयू ने बताया कि संबद्धता नवीनीकरण, नए संस्थान व इनटेक के लिए संबद्ध संस्थाओं को ३१ दिसंबर तक आवेदन करना है। एआईसीटीई के निरीक्षण की जानकारी विवि को नहीं होती। वे स्वयं निर्णय लेकर विवि को सूचित करते हैं, इसके बाद विवि अपनी कार्रवाही आगे बढ़ाता है। फिलहाल मान्यता समाप्त करने को लेकर कोई जानकारी नहीं आई है।