भिलाई

CSVTU का बड़ा फैसला: अब सिर्फ अनपेड जर्नल्स में ही मान्य होंगे रिसर्च पेपर, गुणवत्ता सुधारने सख्त नियम लागू

Bhilai News: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) ने पेड जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च पेपरों को अमान्य घोषित करते हुए अब केवल मान्यता प्राप्त अनपेड (निशुल्क) जर्नल्स में प्रकाशित शोध को ही स्वीकार करने का निर्णय लिया है।

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Apr 01, 2026
सीएसवीटीयू (photo source- Patrika)

CG News: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) ने शोध कार्य की गुणवत्ता सुधारने के लिए अहम कदम उठाते हुए पेड जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च पेपरों पर रोक लगा दी है। अब विवि केवल मानक वाले अनपेड (निशुल्क) जर्नल्स में प्रकाशित शोध पत्रों को ही मान्यता देगा।

विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पीएचडी उपाधि, फैकल्टी प्रमोशन और अन्य अकादमिक मूल्यांकन के लिए अब उन्हीं जर्नल्स में प्रकाशित पेपर मान्य होंगे, जिन्हें सीएसवीटीयू ने मानक सूची में शामिल किया है। अन्य किसी प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित शोध को मान्यता नहीं मिलेगी।

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एमटेक अधूरा छोड़ने वालों को अंतिम मौका

  • विवि ने एमटेक अधूरा छोड़ चुके छात्रों को भी राहत दी है।
  • ऐसे छात्रों को डिप्लोमा सरेंडर करना होगा
  • इसके बाद उन्हें डिग्री पूरी करने का अंतिम अवसर मिलेगा
  • एमटेक की पढ़ाई अब अधिकतम 4 वर्ष में पूरी करनी होगी
  • प्रदेश में ऐसे करीब 1459 छात्र हैं, जिन्होंने एमटेक बीच में छोड़ दिया था और अब पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं।

क्यों जरूरी है रिसर्च पेपर पब्लिकेशन

  • रिसर्च पेपर पब्लिकेशन अकादमिक और करियर विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • कॉलेजों में प्रमोशन के लिए अनिवार्य
  • बेहतर नौकरी के अवसरों में सहायक
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप में जरूरी दस्तावेज

इंजीनियरिंग प्रवेश के नियमों में भी बदलाव

इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए विषयों की बाध्यता भी कम की गई है। अब 12वीं में 14 निर्धारित विषयों में से कोई भी तीन विषय लेकर उत्तीर्ण छात्र इंजीनियरिंग में प्रवेश ले सकेंगे। इन विषयों में भौतिकी, गणित, रसायन, कंप्यूटर साइंस, आईटी, बायोलॉजी, एग्रीकल्चर, बिजनेस स्टडीज, एंटप्रेन्योरशिप आदि शामिल हैं।

पेड जर्नल्स से गुणवत्ता पर असर इसलिए सख्ती

दरअसल, अब तक कई मामलों में पैसे देकर निम्नस्तरीय जर्नल्स में शोध पत्र प्रकाशित कराए जा रहे थे। इन जर्नल्स में न तो समुचित समीक्षा (रिव्यू) होती थी और न ही शोध की गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता था। इसके चलते त्रुटिपूर्ण और कमजोर शोध भी आसानी से प्रकाशित हो जाते थे। विवि ने इसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए यह सख्त निर्णय लिया है।

शोधार्थियों के लिए अनिवार्य होगा शपथ पत्र

नए नियमों के तहत सभी शोधार्थियों को यह शपथ पत्र देना होगा कि उनका रिसर्च पेपर केवल मान्यता प्राप्त अनपेड जर्नल में ही प्रकाशित हुआ है। इसी आधार पर उनके शोध कार्य को मान्यता दी जाएगी।

अमित राजपूप्रभारी कुलसचिव, सीएसवीटीयू के मुताबिक, रिसर्च की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। जर्नल पब्लिकेशन को लेकर नए मानक लागू किए गए हैं।

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Updated on:
01 Apr 2026 07:50 pm
Published on:
01 Apr 2026 07:45 pm
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