
सीएसवीटीयू (photo source- Patrika)
CG News: अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई केवल एक ही विषय तक सीमित नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत कंप्यूटर साइंस का विद्यार्थी मैनेजमेंट पढ़ सकेगा, वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स का छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सिविल इंजीनियरिंग का विद्यार्थी डाटा साइंस जैसे आधुनिक विषयों में भी दक्षता हासिल कर सकेगा। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) ने इस सत्र से माइनर डिग्री शुरू करने का निर्णय लिया है, जिस पर आगामी कार्यपरिषद की बैठक में अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
माइनर डिग्री का अर्थ है कि विद्यार्थी अपने मुख्य इंजीनियरिंग विषय के साथ किसी अन्य विषय में अतिरिक्त अध्ययन करेगा। इसके लिए उसे अतिरिक्त क्रेडिट पूरे करने होंगे, जो उस विषय के मुख्य और वैकल्पिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से हासिल किए जाएंगे। इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थी अपने मूल विभाग से अलग किसी अन्य इंजीनियरिंग शाखा या उभरते तकनीकी क्षेत्र के विषय भी चुन सकेंगे।
सीएसवीटीयू के अनुसार, माइनर डिग्री के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं। चौथे सेमेस्टर तक विद्यार्थी का औसत अंक कम से कम सात होना चाहिए और किसी भी विषय में बैकलॉग नहीं होना चाहिए। यह स्तर आगे के सेमेस्टरों में भी बनाए रखना होगा। माइनर डिग्री के लिए पंजीयन केवल पांचवें सेमेस्टर की शुरुआत में किया जा सकेगा, जबकि छठे सेमेस्टर के बाद नया पंजीयन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
माइनर डिग्री की पढ़ाई सामान्यत: पांचवें से आठवें सेमेस्टर तक चलेगी। इस दौरान विद्यार्थियों को तय क्रेडिट पूरे करने होंगे। ये क्रेडिट विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रमों या स्वीकृत ऑनलाइन अध्ययन पाठ्यक्रमों के माध्यम से भी प्राप्त किए जा सकेंगे।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि एक विद्यार्थी पूरे इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के दौरान केवल एक ही माइनर डिग्री ले सकेगा। माइनर विषय के पाठ्यक्रम मुख्य विषय से अलग होंगे और इसके क्रेडिट मुख्य इंजीनियरिंग डिग्री में नहीं जोड़े जाएंगे। यदि कोई विद्यार्थी माइनर पाठ्यक्रम में असफल हो जाता है या उसका औसत अंक निर्धारित सीमा से नीचे चला जाता है, तो उसका माइनर डिग्री पंजीयन स्वत: समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में उसे केवल उसकी मुख्य इंजीनियरिंग डिग्री ही प्रदान की जाएगी। सभी शर्तें पूरी करने वाले विद्यार्थियों की मुख्य डिग्री के साथ माइनर विषय का उल्लेख डिग्री प्रमाणपत्र और अंकसूची में भी दर्ज रहेगा।
इस नई व्यवस्था से इंजीनियरिंग छात्रों को एक ही समय में दो अलग-अलग क्षेत्रों की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। मुख्य विषय के साथ नए तकनीकी या प्रबंधन से जुड़ा ज्ञान मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। डाटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रबंधन जैसे उभरते क्षेत्रों की समझ भी विकसित होगी। बहु-विषयक पढ़ाई से विद्यार्थियों की योग्यता और कौशल पहले से अधिक मजबूत होंगे। आगे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और उद्योगों की मांग के अनुरूप बहु-कौशल वाले पेशेवर तैयार हो सकेंगे।
इस नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को एक से अधिक क्षेत्रों की समझ मिलेगी और भविष्य में रोजगार के अवसर भी पहले की तुलना में बढ़ेंगे। उन्हें उद्योग जगत का बेहतर एक्सपोजर भी मिलेगा। -डॉ. अरुण अरोरा, कुलपति, सीएसवीटीयू
Published on:
10 Mar 2026 12:33 pm
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