
Digital Cattle Registration: दुर्ग शहर की सड़कों पर जानलेवा बन चुके घूमंतू मवेशियों की अब डिजिटल कुंडली बनेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने भारत पशुधन पोर्टल पर खुले में घूम रहे पशुओं का पंजीयन कराने के निर्देश दिए हैं। एक-एक मवेशी की पहचान और उससे जुड़ी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की इस कवायद के बीच शहर की जमीनी हकीकत जस की तस है। निगम के आकलन के मुताबिक, तीन हजार से ज्यादा मवेशी अब भी सड़कों पर घूम रहे हैं और धरपकड़ अभियान लगभग ठप है।
नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक ने भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकृत वैरिफायर के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में खुले में घूम रहे पशुओं का डिजिटल रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत किए गए बधियाकरण और टीकाकरण की जानकारी भी पोर्टल पर दर्ज होगी। एबीसी सेंटरों की डिजिटल मैपिंग भी अनिवार्य की गई है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मवेशियों को खुले में छोड़ने पर जुर्माना और दोबारा ऐसा करने पर तहसीलदार के माध्यम से धारा 133 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक किसी मवेशी मालिक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। पकड़े जाने पर मालिक सामने नहीं आते, जिससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है।
संजय कोहले, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम दुर्ग के मुताबिक, सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा और गंदगी गंभीर समस्या है। मवेशियों को पकड़ने और नियंत्रित करने के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।
चंद्रशेखर चंद्राकर, प्रभारी बाजार विभाग, नगर निगम दुर्ग के मुताबिक, पकड़े गए मवेशियों को रखने के लिए स्थान की कमी बड़ी अड़चन है। खुले में मवेशी छोड़ने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। मवेशियों को सड़कों से हटाने का काम भी जारी है। खटालों के गोकुल नगर शिफ्ट होने से स्थिति काफी हद तक नियंत्रित होगी।