छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले अधिकतर इंजीनियरिंग कॉलेजों की विभिन्न ब्रांचों में सीटों का घटना तय है।
भिलाई. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने बड़ा फैसला लिया है। नए बदलाव के तहत अब इंजीनियरिंग कॉलेजों के ऐसे ब्रांच जिनमें छात्र संख्या पांच वर्षों से लगातार तीस फीसदी से कम है, उन ब्रांचों के इनटेक नए सत्र से आधे कर दिए जाएंगे। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले अधिकतर इंजीनियरिंग कॉलेजों की विभिन्न ब्रांचों में सीटों का घटना तय है।
प्रदेश में इंजीनियरिंग के 42 कॉलेज हैं, जिनमें से आधा दर्जन बड़े समूहों को छोड़कर शेष में दाखिलों का ग्राफ पिछले पांच साल में लगातार गिरा है। बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज इस दायरे में कम ही आएंगे, जबकि घटते दाखिलों की मार झेल रहे नए व छोटे कॉलेजों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा।
मान लीजिए...एक इंजीनियरिंग कॉलेज में किसी ब्रांच की 60 सीटें है। पिछले पांच वर्षों में तीस फीसदी के हिसाब से अगर हर साल लगभग 19 सीटों से कम दाखिले हो रहे हैं तो इसी ब्रांच की कुल सीट (इनटेक) आधा यानि ३० कर दिया जाएगा। जानकारों के मुताबिक इस दायरे में कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों की कोर ब्रांच भी शामिल हो जाएंगी।
इस साल के दाखिलों पर गौर करें तो कुछ कॉलेज ऐसे रहे जिनमें दस फीसदी सीटें भी नहीं भर पाईं। यह स्थिति वर्षों से बन रही है। छात्रों को आकर्षित करने के लिए ट्विनसिटी के इंजीनियरिंग कॉलेजों ने पिछले साल नए कोर्स शुरू किए। लेकिन रिस्पॉन्स नहीं मिला, ऐसे में कॉलेजों ने खुद ही ब्रांच बंद करने की अर्जी लगाई थीं। एआईसीटीई ने पहले कहा था कि ऐसे कॉलेज जिनमें दाखिले नहीं हो रहे उन्हें बंद कर दिया जाएगा। परिषद ने इस निर्णय को वापस ले लिया है।
हाल ही में जारी की गई हैंडबुक के मुताबिक अब ऐसे कॉलेज बंद नहीं बल्कि उन्हें तीन वर्षों की और मोहलत दी गई है। हालांकि बीते पांच साल में कम दाखिले वाली ब्रांच की सीटें जरूर घटाई जाएंगी। परिषद जनवरी-फरवरी में इस निर्णय पर मुहर लगाएगी। प्रदेश तकनीकी शिक्षा संचालनालय भी घटी हुई सीटों के आधार पर ही विद्यार्थियों के दाखिले कराएगा।
निरीक्षण के बाद क्या?
बीते महीने एआईसीटीई की टीम ने प्रदेश के चार इंजीनियरिंग कॉलेजों का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्हें दाखिले के कमजोर ग्राफ के साथ कॉलेजों में कई खामियां भी मिली थीं। परिषद ने संकेत दिए थे कि इन कॉलेजों को बंद किया जा सकता है। अब नए निर्णय के हिसाब से इन संस्थानों को भी राहत मिली है।
कुलपति सीएसवीटीयू डॉ. एमके वर्मा ने बताया कि एआईसीटीई ने 30 फीसदी से कम प्रवेश वाली ब्रांच की सीटें आधी करने का निर्णय लिया है। इस दायरे में प्रदेश आधे इंजीनियरिंग आएंगे। वैसे इससे कॉलेजों का ही फायदा है।