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जैसलमेर.हमारे पूर्वजों के बेहतरीन कार्य तथा उनकी संस्कृति का मिठास दुनियाभर के लोगों को जैसाण खींच लाता है, लेकिन यहां पहुंचने पर हम उसे बरकरार नहीं रख पा रहे। कई जगह पसरी गंदगी, सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों का अभाव, पर्यटकों से दुव्र्यवहार, लपकागिरी, पार्किंग की समस्या... और भी कई दिक्कतें जिनसे पर्यटक रोजाना रूबरू होते हैं। शहर में कई जगह पर्यटक सहायता केंद्र तो लगे हैं, लेकिन वे ज्यादातर बंद ही रहते हैं। जैसलमेर में इन दिनों पर्यटक सीजन शुरू हो गई है। कुछ ही दिनों में सैलानियों की बहार आने वाली है, लेकिन प्रशासन और पर्यटक विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं दिख रहा।
ऐसा तो नहीं था जैसलमेर...
शहर में पहुंचने के बाद कई जगह सैलानियों से दुव्र्यवहार तक हो जाता है। कई समाज कंटक उनसे मारपीट भी कर देते हैं। टिकट को लेकर भी विवाद हो जाता है। इसके बावजूद जिम्मेदार इन पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं। कई बार सैलानियों के मुंह से निकल जाता है कि सैलानी लाओ, कमीशन ले जाओ
पर्यटन व्यवस्था में लपकों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। हैंडीक्राफ्ट की दुकानों में काम करने तथा पर्यटकों को किसी तरह तैयार कर दुकान तक लाने के लिए कमीशन दिया जा रहा है। ऐसे में वे लोग कमीशन के चक्कर में सैलानियों को परेशान करने में कोई कमी नहीं छोड़ते।
महिला शौचालयों की जरूरत
शहर के सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों की कमी काफी खलती है। खास तौर पर महिला शौचालय तो कहीं नजर ही नहीं आते। यहां लम्बे सफर के बाद पहुंचने वाले पर्यटकों को लघुशंका को लेकर भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पुष्पेंद्र व्यास
जहां मर्जी वहां पार्किंग
जैसलमेर में पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही मनमानी भी शुरू हो गई है। हालात यह है कि जहां मर्जी वहीं पार्किंग बनाकर वसूली की जा रही है, लेकिन इससे नुकसान यह हो रहा है कि शहर व क्षेत्र की ट्रॉफिक व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।
मेघराज परिहार
फैक्ट फाइल
12 पर्यटन क्षेत्र है जैसलमेर में
5 लाख सैलानी आते हैं हर वर्ष
30 हजार से अधिक सैलानी आएंगे किसमस पर
Published on:
24 Dec 2017 08:20 pm
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