कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) डिस्पेंसरी, खुर्सीपार खुद गंभीर रूप से बीमार है। मरीज जिस तरह से गहन चिकित्सा कक्ष में रख दिया जाता है। ठीक उसी तरह से डिस्पेंसरी को झिल्ली उड़ाकर सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। भवन का प्लास्टर गिरने से कई बार स्टाफ घायल होते बच गया है। विभाग की ओर से अब नई बिल्डिंग तलाश की जा रही है। ताकि इसे यहां से शिफ्ट किया जा सके।
खुर्सीपार के डिस्पेंसरी में हर दिन ईएसआईसी कार्डधारी ESIC cardholders करीब 250 मरीज आते हैं। सुबह से ही मरीजों की कतार अस्पताल के बाहर देखने को मिल जाती है। यहां पर उनको दवा भी मिल जाता है। इस तरह एक छत के नीचे सारी व्यवस्था कर दी गई है। यहां 4 चिकित्सक व 22 स्टाफ तैनात हैं। इस भवन में जहां दवाओं को स्टोर किया जाता है। वहां भी छत से पानी रिसता है। इस वजह से दवाओं को भी सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है। यहां लाखों की दवाएं रहती है। वह खराब हो सकती है। इस वजह से भी इस भवन में रहना खतरे से खाली नहीं है।
यह डिस्पेंसरी खुर्सीपार स्थित बीएसपी के 60 साल पुराने स्कूल भवन में संचालित हो रही है। इस भवन का प्लास्टर टूट-टूट कर गिर रहा है। बारिश में पानी रिसने लगता है। जिससे बचाव के लिए विभाग छत पर तिरपाल डाल देता है, तो उसे आसपास के लोग चोरी कर लेते हैं। डिस्पेंसरी के आसपास असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। इस वजह से महिला स्टाफ को भी दिक्कत होती है। प्रबंधन ने इस मामले में खुर्सीपार थाना में शिकायत भी किया है।
डिस्पेंसरी को संचालित करने के लिए नए भवन की तलाश की जा रही है। निगम के अधिकारी भी इस काम में जुटे हैं। निगम ने पिछले साल के दौरान जो नए भवन तैयार किए हैं। उसमें से भी किसी एक में डिस्पेंसरी को शिफ्ट कर सकते हैं। निगम को इसके एवज में कुछ किराया भी मिल जाएगा। वर्तमान में यह भवन बीएसपी से प्रतिमाह 3500 रुपए किराए पर मिला है।
दिलीप कुमार खोब्राखड़े, प्रभारी, ने बताया कि ईएसआईसी डिस्पेंसरी, खुर्सीपार, खुर्सीपार में ईएसआईसी डिस्पेंसरी जिस भवन में संचालित हो रहा है, वह भवन जर्जर हो चुका है। बारिश में पानी रिसने लगता है। दो-दो बार तिरपाल डाले और चोरी हो गया। यहां से भवन को दूसरे जगह शिफ्ट करने की जरूरत है। https://www.patrika.com/prime/exclusive/omg-50-of-bhilai-corporations-security-personnel-are-on-forced-duty-19267093