
BSP Scrap Theft Case: भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से फ्लू डस्ट के परिवहन की आड़ में करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले में दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पत्रिका में लगातार खबर प्रकाशित होने के बाद बीएसपी के जनरल मैनेजर हिमांशु भूषण मलिक (54) और इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज कुमार देवांगन (58) को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को रिसाली स्थित उनके निवास से हिरासत में लिया गया।
पुलिस का दावा है कि जांच में दोनों अधिकारियों की संगठित स्क्रैप चोरी गिरोह से मिलीभगत के पुख्ता तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य मिले हैं। इनके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 15 हो गई है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने बताया कि भिलाई-तीन थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह, खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स के प्लॉट पर छापेमारी की थी। वहां खड़े हाईवा और ट्रकों में बीएसपी के फ्लू डस्ट की आड़ में छिपाकर रखी गई लौह प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री बरामद की गई। परिसर से भी बड़ी मात्रा में अवैध रूप से संग्रहित लौह स्क्रैप मिला।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह संगठित गिरोह पिछले चार-पांच महीनों से फ्लू डस्ट परिवहन के दौरान योजनाबद्ध तरीके से बीएसपी से कीमती स्क्रैप चोरी कर रहा था। चोरी का माल एके ट्रेडर्स में एकत्र कर अवैध रूप से बाजार में बेचा जाता था। पुलिस ने मौके से करीब 250 टन लौह स्क्रैप के अलावा हाईवा, ट्रक, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य भारी मशीनरी भी जब्त की थी।
पुलिस के अनुसार, पहले गिरफ्तार ट्रांसपोर्टर संजय सिंह और सुपरवाइजर घनश्याम गुप्ता से सात दिन की पुलिस रिमांड में पूछताछ की गई। पूछताछ, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद जीएम हिमांशु भूषण मलिक और मनोज कुमार देवांगन की भूमिका सामने आई। जांच में यह भी पाया गया कि दोनों अधिकारियों के संरक्षण के बिना इतने बड़े पैमाने पर स्क्रैप की चोरी और बाहर निकासी संभव नहीं थी।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि एसएमएस-3 स्क्रैप यार्ड की निगरानी, सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों के पास थी। आरोप है कि गिरोह के सदस्य वेट ब्रिज (धर्मकांटा) पहुंचने से पहले वाहनों के नंबर बदल देते थे। इसके बाद फ्लू डस्ट खाली दिखाकर स्क्रैप यार्ड से कीमती लौह स्क्रैप लोड किया जाता और रात के समय वाहनों को प्लांट से बाहर निकाल दिया जाता था। पुलिस ने इस पूरी कार्यप्रणाली से जुड़े डिजिटल एवं मौखिक साक्ष्य जुटाने का दावा किया है।
इस मामले में अब तक करीब 90 लाख रुपए मूल्य का लौह स्क्रैप बरामद किया जा चुका है। वहीं, चोरी और अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहनों तथा भारी मशीनरी सहित कुल 3.22 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच के दौरान मिले तकनीकी और व्यावहारिक साक्ष्यों के आधार पर बीएसपी के जीएम और इंजीनियरिंग एसोसिएट को गिरफ्तार किया गया है। विवेचना जारी है और जल्द ही अन्य फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा— विजय अग्रवाल, दुर्ग एसएसपी