
Padma Vibhushan Teejan Bai: गनियारी का सरकारी स्कूल(photo-patrika)
Padma Vibhushan Teejan Bai: छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को राज्य सरकार ने अनोखी श्रद्धांजलि देने का फैसला किया है। उनके सम्मान में दुर्ग जिले के गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदलकर "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" रखा जाएगा। इसकी घोषणा स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने रविवार को गनियारी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान की।
डॉ. तीजन बाई का रविवार, 6 जुलाई को रायपुर एम्स में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से पूरे छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन के बाद उनका पार्थिव शरीर गृहग्राम गनियारी लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित कई जनप्रतिनिधि, कलाकार, शिष्य और हजारों ग्रामीण मौजूद रहे।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपने जीवन को लोककला, संस्कृति और पंडवानी के संरक्षण व संवर्धन के लिए समर्पित कर दिया। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाई। ऐसे महान व्यक्तित्व को सम्मानित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने उनके गांव के शासकीय विद्यालय का नाम उनके नाम पर रखने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ने का प्रयास है। विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं डॉ. तीजन बाई के संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आगे बढ़ेंगे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली प्रस्तुति और अनूठी पंडवानी शैली के जरिए महाभारत की कथाओं को जीवंत कर दिया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उनके जाने से लोककला जगत को अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनकी कला और विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
मंत्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। विद्यालय का नाम उनके नाम पर होने से आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन संघर्ष, कला साधना और सांस्कृतिक योगदान को जानेंगी तथा उनसे प्रेरणा लेंगी।
उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना भी की। राज्य सरकार ने विश्वास जताया कि डॉ. तीजन बाई की अमूल्य विरासत हमेशा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती रहेगी।
Updated on:
06 Jul 2026 12:48 pm
Published on:
06 Jul 2026 12:47 pm
