CG Milk Production: प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध की उपलब्धता महज 159 ग्राम तक पहुंच पाया है। यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 406 ग्राम है। एक साल पहले तक राष्ट्रीय स्तर पर 1984.05 लाख टन दूध का उत्पादन हो रहा था।
CG Milk Production: दूध की उत्पादकता को बढ़ावा देने हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है। इसका सकारात्मक परिणाम आया है और प्रदेश में दूध का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन प्रति व्यक्ति उपलब्धता के लिहाज से अभी भी स्थिति ठीक नहीं है। कुछ साल पहले जहां प्रतिदिन 13.87 लाख टन दूध का उत्पादन हो रहा था, वहीं यह एक साल पहले तक बढ़कर 18.48 लाख टन तक पहुंच गया।
इससे प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में भी बढ़ोतरी हुई, लेकिन राष्ट्रीय औसत की तुलना में प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 39.19 फीसदी यानी एक तिहाई से कुछ ही ज्यादा है। प्रदेश में यह आंकड़ा 159 ग्राम प्रतिदिन तक पहुंच पाया है।
पशुधन विकास विभाग के 20वें पशु संगणना के मुताबिक प्रदेश में 87.09 लाख दुधारू पशुधन है। इनमें 53.52 लाख गौ, 6.06 लाख भैंस व 27.51 लाख बकरियां हैं। इनमें से 23.99 फीसदी यानी 12.84 लाख गायें दूध दे रही हैं। वहीं 29.80 फीसदी भैसों और 28.22 फीसदी बकरियों से ही दूध मिल रहा है।
प्रदेश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध की उपलब्धता महज 159 ग्राम तक पहुंच पाया है। यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 406 ग्राम है। एक साल पहले तक राष्ट्रीय स्तर पर 1984.05 लाख टन दूध का उत्पादन हो रहा था। इस तरह राष्ट्रीय उत्पादन में हमारा योगदान एक फीसदी भी नहीं है।
प्रदेश में करीब 20 से 30 फीसदी पशुधन से ही दूध प्राप्त होता है। शेष 70 से 80 फीसदी पशुधन ड्राई अथवा अनुपयोगी रहते हैं। इसका मुय कारण लंबे समय तक दूध निकालने का चलन और देसी प्रजाति में विलंब से गर्भधारण माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नस्ल सुधार, डेयरी विकास व दूसरी व्यवस्थाओं से काफी हद तक सुधार किया जा सकता है।
प्रगतिशील दुग्ध उत्पादक कृषक समिति के अध्यक्ष रविप्रकाश ताम्रकार बताते हैं कि पशुपालन का कार्य खेती के साथ विकल्प के रूप में किया जाता है। अधिकतर लोग इससे खुद की जरूरत की पूर्ति तक ही सीमित हो गए हैं। पशुपालन को भी मुय उद्यम के रूप में अपनाए जाने की दरकार है। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों के लिए लाभकारी भी साबित होगा।