
भिलाई. डोंगरगढ़ आरक्षित सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार विद्या रामटेके पति अरुण रामटेके से नामांकन भरते समय सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित शुल्क वसूल लिया गया, जो आरक्षित वर्ग के शुल्क से दोगुना है। आपत्ति आने पर निर्वाचन अधिकारी सकते में हैं। हालांकि खुद को बचाने के लिए उन्होंने जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन होने के बाद निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली राशि लौटाने की बात कही है। लेकिन सवाल है कि जाति प्रमाण पत्र सही नहीं है तो नामांकन निरस्त क्यों नहीं किया? वैसे भी आरक्षित सीट पर तो सामान्य वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लडऩे के लिए पात्र ही नही होता।
दुर्ग में जाति प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड गायब
सबसे बड़ी बात यह है कि दुर्ग तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड से १९९७ में जाति प्रमाण पत्र बनवाने वाले ९०० लोगों के रिकॉर्ड गायब है। कार्यालय में उपलब्ध पंजी में सरल क्रमांक २०९९ के बाद से सीधे ३००० का उल्लेख है। बीच से सरल क्रमांक २१०० से २९९९ तक कुल ९०० लोगों के नाम और सरल क्रमांक दोनों गायब हैं। विद्याराम टेके का सरल क्रमांक- २९०३ है। उनके जाति प्रमाण पत्र में दुर्ग तहसील कार्यालय से २३ अगस्त १९९७ को जारी होने का उल्लेख है।
शिकायत पर रसीद लौटाने कहा
बता दें कि विद्या रामटेके पति अरुण रामटेके का मायका सुपेला भिलाई है। दुर्ग तहसील कार्यालय से जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाया था। शादी के बाद वे डोंगरगढ़ चली गईं। आम आदमी पार्टी ने डोंगरगढ़ विधानसभा सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाया है।
यह है नियम
निर्वाचन संचालन नियम १९६१ में आरक्षण और शुल्क का स्पष्ट प्रावधान है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर रिटर्निंग ऑफिसर को जाति प्रमाण पत्र सत्यापन कराने का पूरा अधिकार है। नाम निर्देशन पत्र २(ख) के लिए निर्धारित शुल्क ही लिया जाना है। अनुसूचित और अनुसूचित जन जाति के लिए शुल्क ५ हजार रुपए है। सामान्य सीट के लिए नामांकन शुल्क १० हजार रुपए है। लेकिन यहां आरक्षित वर्ग से भी १० हजार रुपए लिया गया है।
नामांकन शुल्क वापस किया जाएगा
भीम सिंह, कलक्टर, राजनांदगांव ने बताया कि हो सकता है जाति प्रमाण पत्र की वजह से पूरा शुल्क ले लिया गया है। जाति प्रमाण और रसीद जमा करने पर नामांकन शुल्क वापस कर दिया जाएगा।