भिलाई

OMG .. 7 माह में ही दम तोड़ दिया विद्युत शवदाह गृह मशीन ने, पर्यावरण के नाम पर निगम ने आधा करोड़ बहाया पानी में

रामनगर मुक्तिधाम में 48 लाख रुपए खर्च कर विद्युत शवदाह गृह के लिए मशीन लगाई गई। वह मशीन सिर्फ 7 माह तक चालू थी, इसके बाद से बंद है। करीब दर्जनभर शव का इसमें अंतिम संस्कार किया जा सका। इस मशीन को लगाने का मकसद पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करना था। इसके साथ-साथ निगम को 101 रुपए में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी उपलब्ध करवाने में जो बड़ा खर्च सामने आ रहा था, उस खर्च में कटौती भी था। इस मशीन में अगस्त 2023 से खराबी आ गई है और वह बंद पड़ी है।

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Feb 22, 2024
OMG .. 7 माह में ही दम तोड़ दिया विद्युत शवदाह गृह मशीन ने, पर्यावरण के नाम पर निगम ने आधा करोड़ बहाया पानी में

रख-रखाव के नाम पर हर साल 4.35 लाख

रामनगर मुक्तिधाम में विद्युत शवदाह गृह को करीब 48.50 लाख की लागत से तैयार किए थे। निगम ने इसके रख-रखाव का काम भी तय किया था। इसके नाम से 4.35 लाख रुपए खर्च किया जाना था। नई मशीन कैसे खराब हो गई, इसके देख-रेख की जिम्मेदारी एक साल तक भी क्या कंपनी के जिम्मे नहीं थी। कंपनी को पूरा भुगतान हो चुका है क्या। इसका जवाब निगम के अधिकारियों को देना है।

जनवरी में किए थे पहला अंतिम संस्कार

रामनगर मुक्तिधाम में विद्युत शवदाह गृह को 5 जनवरी 2023 को शुरू किया गया था। निगम के अधिकारियों के मौजूदगी में 84 साल के बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किए थे। इसके बाद करीब 13 शव का अंतिम संस्कार इसमें किया गया। अगस्त में इस मशीन में कोई तकनीकी दिक्कत आ गई। तब से वह बंद ही है।

खर्च कम करने किए थे पहल

इस शवदाह के शुरू होने से मुक्तिधाम का खर्च कम हो जाएगा, यह उम्मीद की जा रही थी। वहीं दूसरी ओर इसे पर्यावरण लिहाज से बेहतर माना जा रहा था।

हर दिन होता है 10 शवों का अंतिम संस्कार

रामनगर मुक्तिधाम, सुपेला में हर दिन औसत 10 शवों का अंतिम संस्कार होता है। लकड़ी से अंतिम संस्कार करने से पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है। इससे बचाव के लिए निगम ने विद्युत शवदाह गृह को शुरू करवाया था। विद्युत शवदाह गृह से हर डेढ़ घंटे में एक शव का अंतिम संस्कार करने का दावा किकया जा रहा था। वहीं मशीन चंद माह में ही थम गई है।

हर माह खाक हो रही 960 क्विंटल लकड़ी

एक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए 4 क्विंटल से अधिक लकड़ी खप जाती है। इस तरह से हर माह करीब 960 टन लकड़ी खाक हो रही है। पौध रोपण जितना हो नहीं रहा है। उससे कई गुना लकड़ी काटी जा रही है। यह पर्यावरण के लिए नुकसान वाली बात है।

लकड़ी खरीदने में हर साल खर्च हो जाता है 72 लाख

रामनगर मुक्तिधाम में हर माह करीब 6,00,000 रुपए की लकड़ी जलाई जा रही है। एक साल के दौरान अंतिम संस्कार करने में करीब 72,00,000 रुपए की लकड़ी जलकर खाक हो जाती है। विद्युत शवदाह गृह शुरू करते वक्त उम्मीद की जा रही थी, कि कम से कम वह खर्च घटकर 24,00,000 रुपए रह जाएगा। ऐसा हुआ नहीं, 101 रुपए में 4 क्विंटल लकड़ी दी जा रही है, मशीन बंद पड़ी हुई है।

Published on:
22 Feb 2024 07:40 pm
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