प्रधानमंत्री कार्यालय ने वार्ड-7 आनंद विहार कॉलोनी उल्लास नगर की ईडब्ल्यूएस की जमीन के संबंध में नगर निगम से जवाब मांगा है।
भिलाई. प्रधानमंत्री कार्यालय ने वार्ड-7 आनंद विहार कॉलोनी उल्लास नगर की ईडब्ल्यूएस की जमीन के संबंध में नगर निगम से जवाब मांगा है। सेक्शन ऑफिसर समीर कुमार ने मुख्य सचिव विवेक ढांढ के नाम भी पत्र लिखा है। उन्होंने उल्लास नगर की जमीन पर कब्जा की शिकायत का निराकरण की जानकारी के साथ रिपोर्ट पीएमओ कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।
वार्ड-7 आनंद विहार कॉलोनी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 15 फीसदी आरक्षित जमीन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम ३० नवंबर को पत्र लिखे पत्र में कहा गया है कि वार्ड-७ आनंद विहार कॉलोनी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए १५ फीसदी जमीन आरक्षित है। कॉलोनी में लगभग २० हजार वर्ग फीट जमीन है। जिसमें प्रधानमंत्री आवास के तहत मकान बनाया जाना है। इस जमीन पर वार्ड के कुछ लोगों ने कब्जा कर मकान बना लिया है। इसके खिलाफ ५ जुलाई को कलक्टर जनदर्शन में शिकायत की थी। तब नगर पालिक निगम की टीम ने ई डब्ल्यूएस की जमीन का सींमाकन किया। ११ जुलाई को कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे, लेकिन कब्जेधारियों की विरोध की वजह से निगम प्रशासन की टीम वापस लौट गई। कब्जे की जमीन को अपना बताने के लिए निगम और जिला प्रशासन को फर्जी आदेश पत्र बनाकर गुमराह करने का प्रयास किया गया।
बढ़ता जा रहा है जमीन पर कब्जा
शिकायकर्ताओं का यह भी कहना है कि निगम प्रशासन के रिकॉर्ड में उल्लास नगर कॉलोनी में ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित जमीन है। कब्जा हटाने के लिए निगम प्रशासन कई बार जमीन की नामजोख कर चुकी है। इसके बावजूद निगम ने फैसिंग नहीं कराया। इस वजह से जमीन पर कब्जा बढ़ते ही जा रही है।
एक्ट 1998 की कंडिका 10 के प्रावधान
प्रत्येक आवासीय कॉलोनी में कुल भूमि का १५ प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित रखना है।
नगर निगम का कब्जा होने के बाद भवन निर्माता को नक्शा और भवन बनाने की अनुमति देना है।
निगम सुरक्षित जमीन के लागत मूल्य की राशि कॉलोनाइजर्स को देगा। (एक रुपए प्रति फुट)
कुल दो हैक्टेयर (पांच एकड़) अविकसित जमीन पर आश्रय शुल्क लेने का प्रावधान है।
दो हैक्टेयर से अधिक जमीन होने पर कॉलोनाइजर्स को 15 फीसदी जमीन छोडऩा होगी।
नियमानुसार आश्रय शुल्क जिले में पदेन कलक्टर तय करेंगे।
राशि को आश्रय निधि के तहत खाता खोलकर जमा किया जाएगा। यह कलेक्टर के अधीन होगा।
इस राशि का उपयोग राज्य सरकार के निर्देश पर बनी समिति करेगी।
इनसे अनुमति लेना अनिवार्य
अधिनियम १९७६ के तहत नगर निगम आयुक्त से अनापत्ति प्रमाण-पत्र
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता १९५९ के व्यपवर्तन शर्तां का पालन प्रतिवेदन
नगर तथा ग्राम निवेश से अधिनियम १९७३ के तहत विकास अनुज्ञा
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
बता दें कि निजी कॉलोनी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरिक्षत १५ फीसदी जमीन का मामला पत्रिका ने उठाया था। पत्रिका ने बताया था कि शहर में ५५ से अधिक कॉलोनाइजर्स है। जिन्होंने निजी कॉलोनी बसाई है, लेकिन ईडब्ल्यूएस की जमीन को निगम प्रशासन को हैंडओवर नहीं किया है। समाचार प्रकाशन के बाद कॉलोनाइजर्स ने जमीन को निगम प्रशासन के नाम रजिस्ट्री कराई, तीन कॉलोनाइजर्स और सोसायटी ने निगम को ईडब्ल्यूएस की जमीन पर कब्जा होने की वजह से रजिस्ट्री नहीं किया है। निगम प्रशासन ने ऐसे लोगों को नोटिस जारी किया है।