डेंगू के जानलेवा होने की वजह उसके थर्ड स्टेज का वायरस है। ब्लड सैंपल की जांच के बाद इसका खुलासा राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वैज्ञानिकों ने किया है।
दुर्ग/भिलाई. डेंगू के जानलेवा होने की वजह उसके थर्ड स्टेज का वायरस है। ब्लड सैंपल की जांच के बाद इसका खुलासा राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वैज्ञानिकों ने किया है।
शहर में डेंगू से अब तक १८ लोगों की जान जा चुकी है
पत्रिका ने पहले ही डेंगू के वायरस के थर्ड स्टेज में पहुंचने की आशंका जताई थी। जांच में यह आशंका सही साबित हुई। शहर में डेंगू से अब तक १८ लोगों की जान जा चुकी है। एक के बाद एक मौतों से डॉक्टर भी हैरान थे कि डेंगू पर दवा का प्रभावी असर आखिर क्यों नहीं हो रहा है। इसके बाद अलग-अलग मरीजों के सात ब्लड सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर भेजा गया था।
इस महामारी का कल्चर रिपोर्ट जिला प्रशासन को मिला
15 अगस्त को जबलपुर के वैज्ञानिकों से जिले में फैली इस महामारी का कल्चर रिपोर्ट जिला प्रशासन को मिला। अब इस रिपोर्ट को आधार बनाकर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ इसका आगे का अध्यय कर रहे हैं। राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने खुर्सीपार और स्पर्श हास्पिटल में भर्ती मरीजों की चिकित्सकों से जानकारी ली। आईसीयू में भर्ती मरीजों के परिजनों से भी मिले। डेंगू के इलाज में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर हेल्प लाइन नंबर 9589 727307 पर डायल कर शिकायत दर्ज कराने कहा।
सात मरीजों का ब्लड सैंपल भेजा था
स्वास्थ्य विभाग ने 7 मरीजों का ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा था। इसमें से दो सैंपल चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल नेहरु नगर और पांच ब्लड सैंपल जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों का था।
अन्य जांच निगेटिव
राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वैज्ञानिकों ने ब्लड सैंपल का डेंगू के अलावा चिकन गुनिया, काला ज्वर, स्वाइन फ्लू का टेस्ट भी किया। सभी मरीजों में केवल डेंगू थर्ड स्टेज का वायरस पाया गया।
दुर्ग में मिले नए मरीज
भिलाई के बाद दुर्ग में भी दस दिनों में दर्जन भर डेंगू के मरीज चिन्हित किए गए हैं। बुधवार को तीन बुखार पीडि़तों को डेंगू होने की आशंका व्यक्त की गई। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों का कहना है कि लक्ष्ण डेंगू का है। चिन्हित मरीज में विराट नगर बोरसी के अश्वनी वर्मा, पांच बिल्डिंग के रितिक धान व निलेश गंधर्व शामिल हैं।
पनप चुके लार्वा को नष्ट नहीं किया गया
डेंगू के नियंत्रण में नाकामी की एक बड़ी वजह नियंणत्र के लिए चलाए अभियान की खामी भी रही है। चिकित्सकों की स्टडी रिपोर्ट में एक बड़ी चूक की ओर इशारा किया गया गया है। यह चूक कूलर का पानी खाली करवाने के लिए चलाए अभियान में हुई है। क्योंकि कूलर का पानी तो खाली किया गया पर लार्वा को नष्ट किया गया। कूलर का पानी खाली करवाने के साथ उसमें पनप चुके लार्वा को नष्ट नहीं किया गया। कूलर के पानी को नाली में बहा दिया गया। लार्वायुक्त पानी जहां भी बहकर गया वह क्षेत्र भी डेंगू वायरस से प्रभावित होता चला गया।
सर्वे में नहीं मिले, अब सामने आ रहे पॉजिटिव
स्वास्थ्य विभाग की सर्वे टीम ने जिन वार्डों में डेंगू बुखार से कोई भी पीडि़त नहीं होने का रिपोर्ट दी थी,अब उन वार्डों में डेंगू बुखार से पीडि़त लोग इलाज के लिए चिकित्सालयों में पहुंच रहे हैं। वार्ड-७, वार्ड-१२, वार्ड-९ कोहका, वार्ड-१० शांति नगर में सर्वे में डेंगू के मरीज नहीं मिले थे। अब रोज नए मरीज आ रहे हैं।
मैलाथियान दवा इसलिए हो गई अप्रभावी
प्रभावित वार्ड में मैलाथियान दवा छिड़काव का अभियान तो चलाया। यह दवा मच्छर के लार्वा को मारने में नाकाम रहा। जिस घर में मरीज मिले, उसके आसपास के एरिया में दवा का छिड़काव कर छोड़ दिया। चिकित्सकों की स्ट्डी के अनुसार एक सर्कल बनाकर सघन दवा का छिड़काव किया जाना था। हर घर में दवा का छिड़काव होना था।
नियंत्रण के लिए कदम देर से उठाए
सबसे बड़ी चूक यह है कि प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। डेंगू को मानने से इनकार करते रहे। जब स्थिति कंट्रोल से बाहर होने लगी तब प्लॉन बनाना शुरू किया। प्लॉन बनाने और चिकित्सकों को लाइनअप करने में समय लग गया। प्रशिक्षित स्वास्थ्य अमला की हड़ताल की वजह से प्लॉन गड़बड़ा गई।
टॉयर में जमा मिला पानी, लगाया 1 लाख जुर्माना
करबला मैदान जीई रोड किनारे केजीएन टॉयर्स शॉप के टायर में भरे पानी में लार्वा मिलने पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना एक लाख रुपए लगाया। नसरूद्दीन रिपेयरिंग शॉप संचालक पर ५ हजार और वहीं खुर्सीपार और वैशाली नगर के खटाल संचालकों पर एक लाख पांच हजार जुर्माना लगाया।