7 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

African Swine Fever: छत्तीसगढ़ में ASF का कहर! 300 से ज्यादा सूअरों की मौत, 150 को मारा गया

African Swine Fever: दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि के बाद 300 से अधिक सूअरों की मौत हो गई। संक्रमण रोकने के लिए 150 सूअरों को मारकर फार्म को सील किया जा रहा है।

2 min read
Google source verification
अफ्रीकन स्वाइन फीवर से 300 सूअरों की मौत (photo source- Patrika)

अफ्रीकन स्वाइन फीवर से 300 सूअरों की मौत (photo source- Patrika)

African Swine Fever: छत्तीसगढ़ में एक गंभीर पशु रोग का मामला सामने आया है, जहां जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव स्थित एक सूअर फार्म में इस खतरनाक वायरस की पुष्टि हुई, जिसके चलते 300 से अधिक सूअरों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और पशुपालकों में भय का माहौल बन गया है।

African Swine Fever: सूअरों को जहरीला इंजेक्शन दिया…

जानकारी के मुताबिक, फार्म में अचानक बड़ी संख्या में सूअरों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। कुछ ही समय में वे गंभीर रूप से बीमार होकर मरने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच के बाद अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि की गई। इस वायरस के फैलने का खतरा बेहद ज्यादा होता है, इसलिए विभाग ने तुरंत सख्त कदम उठाए।

संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने फार्म में बचे हुए लगभग 150 सूअरों को भी मारने का फैसला लिया। मेडिकल टीम ने पीपीई किट पहनकर पूरे प्रोटोकॉल के तहत सूअरों को जहरीला इंजेक्शन दिया, ताकि वायरस का प्रसार आगे न हो सके। इसके बाद सभी मृत सूअरों को फार्म परिसर के पीछे गड्ढे खोदकर सुरक्षित तरीके से दफनाया गया, जिससे संक्रमण फैलने का जोखिम कम किया जा सके। इस पूरे घटनाक्रम से फार्म संचालक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

African Swine Fever: आसपास के क्षेत्रों में बढ़ा दी निगरानी

अनुमान के अनुसार करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए की क्षति हुई है, जो पशुपालन व्यवसाय के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। फिलहाल प्रशासन द्वारा पूरे फार्म को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों द्वारा अन्य सूअर फार्मों की जांच और सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इस खतरनाक बीमारी को फैलने से रोका जा सके।

गौरतलब है कि मुडपार गांव सूअर पालन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है, जहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर उत्पादन होता रहा है। यहां से न केवल दुर्ग-भिलाई क्षेत्र, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों तक पोर्क की आपूर्ति की जाती थी। ऐसे में इस वायरस के फैलने से न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि व्यापक स्तर पर भी पशुपालन उद्योग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।