
Bhilai Steel Plant: बीएसपी से 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई की एंट्री से संयंत्र प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। रविवार को सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने बीएसपी के भीतर दबिश देकर स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस-3) और प्लेट मिल के कार्यालयों में महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खंगाला। इस करोड़ों रुपए के महाघोटाले को 'पत्रिका' ने सबसे पहले प्रमुखता से उजागर किया था, जिसके बाद अब केंद्रीय एजेंसी ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है।
सीबीआई की टीम रविवार सुबह करीब 10 बजे बीएसपी के मुख्य गेट पर पहुंची। केंद्रीय एजेंसी के औचक आगमन की सूचना मिलते ही बीएसपी प्रबंधन और सीआईएसएफ के आला अधिकारी सकते में आ गए। गेट पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद टीम सीधे प्लांट के भीतर एसएमएस-3 और प्लेट मिल पहुंची। टीम ने वहां मौजूद अधिकारियों से पूछताछ की और टेंडर व स्क्रैप डिस्पोजल से जुड़े जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। करीब 4 घंटे तक चली इस प्रारंभिक जांच के बाद टीम रवाना हो गई। सीआईएसएफ ने भी सीबीआई टीम के प्लांट में प्रवेश की आधिकारिक पुष्टि की है।
सीबीआई अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि रविवार होने के कारण यह सिर्फ शुरुआती जांच थी; जल्द ही बड़ी टीम आकर व्यापक कार्रवाई करेगी। अब इस जांच के दायरे में टेंडर प्रक्रिया, स्क्रैप यार्ड के अधिकारी, ब्लास्ट फर्नेस-8 और मैगडम से फ्लू डस्ट बाहर निकालने की पूरी कार्यप्रणाली शामिल होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस निष्पक्ष जांच से बीएसपी के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों, सीआईएसएफ कर्मियों, रसूखदार ठेकेदारों और ट्रांसपोर्टरों के उस गठजोड़ (सिंडिकेट) का पर्दाफाश होगा जो वर्षों से संयंत्र की कीमती संपत्तियों को चूना लगा रहा था।
गौरतलब है कि दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर एटीएस और भिलाई-3 पुलिस ने 26 मई 2026 को ग्राम अकलोरडीह स्थित 'एके ट्रेडर्स' के गोदाम पर छापा मारा था। इस कार्रवाई में पुलिस ने बीएसपी का 250 टन लौह स्क्रैप, वाहन और मशीनरी सहित कुल 3.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। मामले में बीएसपी के दो अधिकारियों समेत अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। मुख्य सरगना और ट्रांसपोर्टर संजय सिंह द्वारा चोरी की रकम से बनाई गई 3 करोड़ की चल-अचल संपत्ति और 50 लाख रुपये के जेवरात भी जब्त किए जा चुके हैं।