
Railway Connectivity: दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना के तहत ताड़ोकी-रावघाट रेलखंड पर यात्री ट्रेन चलाने का रास्ता साफ हो गया है। रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के निरीक्षण और स्वीकृति के बाद यात्री परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ट्रेन सेवा शुरू होने से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों तक लोगों की पहुंच आसान होगी। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएमसी) और भारतीय रेलवे के संयुक्त प्रयासों से विकसित हो रही करीब 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना में बीएसपी की ओर से अब तक करीब 1735 करोड़ रुपए का निवेश किया जा चुका है। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 1880 करोड़ रुपए से अधिक है। परियोजना में रेलवे लाइन के साथ स्टेशनों और विद्युतीकरण संबंधी कार्यों में भी बीएसपी ने वित्तीय सहयोग दिया है।
रेल कॉरिडोर के पूरी तरह परिचालन में आने से लौह अयस्क परिवहन का लॉजिस्टिक्स ढांचा मजबूत होगा। वहीं यात्री सेवा शुरू होने से बस्तर के लोगों को आवागमन का नया विकल्प मिलेगा। इससे क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
रावघाट रेलखंड पर 17 जून को तकनीकी परीक्षण शुरू किया गया था। नियंत्रित गति और सीमित भार के साथ 58 वैगन वाली बॉक्सएन रेक से परीक्षण कर परिचालन संबंधी तकनीकी तैयारियों को परखा गया। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सल प्रभावित क्षेत्र से होकर गुजरने के कारण परियोजना का निर्माण चुनौतीपूर्ण रहा है।
इस परियोजना की शुरुआत 2008 में हुए समझौता ज्ञापन के आधार पर हुई थी। शुरुआती उद्देश्य लौह अयस्क परिवहन के लिए रेल संपर्क विकसित करना था। बाद में परियोजना का दायरा बढ़ाकर एकर इसे बस्तर क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में विकसित किया गया। वर्ष 2022 में दल्लीराजहरा-ताड़ोकी के बीच यात्री रेल सेवा शुरू हो चुकी है। अब रावघाट तक रेल संपर्क विस्तार से इसका लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने की उम्मीद है।