
TB Cases: टीबी के खिलाफ चल रही मुहिम में माइक्रो लेवल पर की जा रही जांच से बीमारी की छिपी तस्वीर सामने आ रही है। दुर्ग जिले के मोरिद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के एनजीओ के माध्यम से कराए गए सर्वे में तीन महीने में 29 टीबी पॉजिटिव मरीज मिले हैं। वहीं, रुआबांधा क्षेत्र में भी सर्वे के दौरान 20 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग अब इन मरीजों को नियमित उपचार से जोड़ने के साथ उनके परिवार के सदस्यों की भी जांच और जरूरत के अनुसार बचाव की दवा देने पर जोर दे रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी के कई मरीज लक्षण कम होने के बाद दवा लेना बंद कर देते हैं। इससे बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती और दोबारा सक्रिय होने के साथ संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। उपचार अधूरा छोड़ने वाला मरीज अपने संपर्क में आने वाले अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग मरीजों की काउंसलिंग के साथ नियमित दवा सेवन पर जोर दे रहा है।
बीईटीओ, शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम, चरोदा-भिलाई-3, सैयद असलम के अनुसार धूम्रपान, तंबाकू और शराब के सेवन के साथ धूल-धुएं और प्रदूषण का असर भी फेफड़ों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्रों और घनी आबादी में रहने वाले लोगों में टीबी के लक्षण मिलने पर जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है। सर्वे के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें मरीजों के सत्यापन और उपचार को लेकर टीमवर्क कर रही हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मितानिन तथा स्वास्थ्यकर्मी लक्षण वाले लोगों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग करते हैं। संदिग्ध मरीजों के बलगम के नमूने लेकर ट्रू-नॉट और सीबी-नॉट जैसी जांच के माध्यम से बीमारी की पुष्टि की जाती है। टीबी एचबी राहुल यादव के अनुसार ऐसे कई मरीज सामने आ रहे हैं, जिनके परिवार में पहले टीबी का इतिहास रहा है और उपचार पूरा नहीं हुआ था। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।