
IIT Bhilai Smart Coating: देश के पुल, औद्योगिक मशीनें, वाहन, समुद्री ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र के उपकरण अब जंग और आग से लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेंगे। आईआईटी भिलाई और आईआईटी पटना के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से ऐसी बहुउद्देशीय सुरक्षात्मक कोटिंग विकसित की है, जो धातु को जंग से बचाने के साथ आग से भी सुरक्षा प्रदान करती है। यह कोटिंग खारे पानी, नमी और प्रतिकूल मौसम में भी प्रभावी रहती है, जिससे धातु से बने ढांचों की उम्र बढऩे के साथ रखरखाव की लागत भी कम होगी। इस शोध का नेतृत्व आईआईटी भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. संजीब बनर्जी ने किया। शोध दल में निशिकांत सिंह, स्वरूप मैती, सौमेन घोष और सुब्रत चट्टोपाध्याय शामिल रहे। शोध के परिणाम दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने फॉस्फोरस और फ्लोरीन आधारित विशेष सामग्री से यह नई कोटिंग तैयार की है। पारंपरिक कोटिंग जहां केवल एक ही उद्देश्य पूरा करती हैं, वहीं नई तकनीक एक ही परत में जंगरोधी, अग्निरोधी और टिकाऊ सुरक्षा प्रदान करती है। यह धातु की सतह पर मजबूती से चिपकती है और आग लगने की स्थिति में लपटों के फैलाव को भी धीमा करती है। परीक्षण में यह कोटिंग खारे पानी और कठिन मौसमीय परिस्थितियों में भी प्रभावी साबित हुई।
प्रो. संजीब बनर्जी के अनुसार अब तक उद्योगों को जंग से बचाव, टिकाऊपन और अग्नि सुरक्षा के लिए अलग-अलग प्रकार की कोटिंग का इस्तेमाल करना पड़ता था। नई तकनीक इन सभी गुणों को एक ही परत में उपलब्ध कराती है। इससे रखरखाव का खर्च घटेगा, मरम्मत की जरूरत कम होगी और उद्योगों को अधिक भरोसेमंद समाधान मिलेगा।
लोहे और स्टील के पुलों की उम्र बढ़ेगी।
कारखानों की मशीनों को जंग और आग से बेहतर सुरक्षा मिलेगी।
वाहनों और भारी औद्योगिक उपकरणों का रखरखाव आसान होगा।
समुद्री ढांचों और ऊर्जा क्षेत्र के उपकरणों की टिकाऊ क्षमता बढ़ेगी।
यह शोध उन्नत सामग्री विज्ञान (एडवांस्ड मैटेरियल्स) के क्षेत्र में आईआईटी भिलाई की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में निर्माण, परिवहन, ऊर्जा और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है तथा भारत में विकसित स्वदेशी तकनीकों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।