गुण्डरदेही के पूर्व राजघराने की बहू प्रभा सिंह के प्रकरण की सुनवाई एसडीएम की जगह कलक्टर उमेश अग्रवाल के न्यायालय में होगी।
दुर्ग. गुण्डरदेही के पूर्व राजघराने की बहू प्रभा सिंह के प्रकरण की सुनवाई एसडीएम की जगह कलक्टर उमेश अग्रवाल के न्यायालय में होगी। प्रभा सिंह दो माह से २ वर्ष के मासूम बेटे के लिए भटक रही है। उन्होंने एसडीएम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया है। उसका आरोप है कि उसके पति संदीप राय ने उससे बेटे को छिन लिया है। विचारण में लेटलतीफ होने पर महमरा महतारी महिला समिति की महिलाओं ने उसे लेकर कलक्टर से मुलाकात की।
महिला संगठन ने कलक्टर को सौंपा ज्ञापन
महिला संगठन ने कलक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि प्रभा सिंह को अब तक यह नहीं मालूम कि उसका बेटा कहां है। एसडीएम न्याायलय में उपस्थित होने के बाद भी संदीप राय गुमराह कर रहा है। महिला संगठन के पदाधिकारियों ने कलक्टर को जानकारी दी कि घटना के बाद प्रभा सिंह २५ अप्रैल को पद्मनाभपुर पुलिस चौकी में बेटे के गायब होने की शिकायत दर्ज कराने गई थी। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करने के बजाय धारा १५५ के तहत पुलिस हस्तक्षेप अयोग्य की फौती काटकर थमा दिया।
यह है मामला
प्रभा सिंह (29 वर्ष) का कहना है कि वह ऋषभ सिटी पोटियाकला में रहती है। पति द्वारा मारपीट करने के कारण वह अलग रह रही है। २४ अप्रैल को वह अपने घर पर थी। उसका पति उससे मुलाकात करने आया था। अचानक विवाद होने पर वह भीतर कमरे में चली गई। कुछ देर बाद जब वह बाहर आई तो पति व उसका बेटा गायब था। इसके बाद से वह महिला थाना से लेकर एसडीएम कार्यालय का चक्कर लगा रही है।
मेरा उनसे कोई संबंध नहीं - विधायक राजेंद्र कुमार राय
गुंडरदेही के विधायक राजेंद्र कुमार राय ने कहा कि संदीप राय और प्रभा सिंह से उनका कोई संबंध नहीं है। आज से दो साल पहले ही उन्होंने दैनिक समाचार पत्रों में ईश्तहार छपाकर यह खुलासा कर दिया था कि उनके परिवार से संदीप का कोई लेना-देना नहीं है। नहीं वे उनसे कोई रिश्ता रखना चाहते हैं। इस संबंध में उन्होंने संबंधित पुलिस थाना के अलावा आई दुर्ग को भी पत्र के माध्यम से पहले ही अवगत करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि वे एक राष्ट्रीय पार्टी के सम्मानित कार्यकर्ता और राजनीति से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं इसलिए उनका नाम जोड़ दिया जाता है जो अनुचित तथा यह मामला उनकी मानहानि की श्रेणी में आता है। उन्होंने भविष्य में उनका नाम जोडऩे पर कोर्ट की शरण लेने की बात कही है।