ताजा मामला इसी हड़ताल और उधेड़-बुन में उलझे दो पुलिस जवान की है। एक ने जहां पत्नी की पिटाई वहीं दूसरे जवान ने पत्नी की रखवाली के लिए छुट्टी मांगी है।
सत्यनारायण शुक्ला/भिलाई. छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार पुलिस परिजनों (मां, पत्नी और बच्चों) के आंदोलन पर उतरने के बाद नए-नए किस्से सामने आ रहे हैं। एक ओर जहां शासन और प्रशासन की ओर से आंदोलन को कुचलने का भरसक प्रयास किया गया, वहीं महिलाओं ने भी मांगों को लेकर अपनी आवज बुलंद की और बिना लाउड स्पीकर के आंदोलन पर डटी रहीं। इसी तरह विभाग के कुछ उच्च अधिकारी भी मांगों का समर्थन करते दिखें, तो कुछ अधिकारी शासन के निर्देश पर परिजनों को गिरफ्तार की धमकी भी दे रहे थे।
ताजा मामला इसी हड़ताल और उधेड़-बुन में उलझे दो पुलिस जवान की है। एक ने जहां पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर पत्नी की पिटाई करने की अनुमति मांगी हैं वहीं दूसरे जवान ने पत्नी की रखवाली (कहीं आंदोलन में शामिल न हो जाए) के लिए छुट्टी मांगी है।
पत्र का मजमून इस प्रकार है
रायगढ़ में पदस्थ प्रधान आरक्षक संजय कुमार सिंग, क्रमांक 211 ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। एसपी को लिखे पत्र का विषय पत्नी को डराने-धमकाने और मारने पीटने की अनुमति चाहने बाबत है।
निवेदन है कि मैं प्रधान आरक्षक संजय कुमार सिंग 211 आपके अधीनस्थ रक्षित केंद्र रायगढ़ में कार्यरत हूं। मेरी पत्नी जो ऊंचे खानदान और राजनीतिक घराने से तालुल्क रखती है। जिसके कारण मैं अपनी पत्नी के आदेशानुसार कार्य करता हूं। वह 25 जून को रायुपर में होने वाले पुलिस परिवार के धरना-प्रदर्शन में शामिल होना चाहती है। मैं नहीं चाहता कि वह उक्त धरना में शामिल हो। उसे जाने से रोकने के लिए पत्नी को मारना-पीटना आवश्यक है। लेकिन उनका मायका राजनीतिक घराना होने के कारण कभी भी मुझ पर अपराध दर्ज करवा सकती है?
अत: श्रीमान जी से निवेदन है कि मुझे अपनी पत्नी को डराने धमकाने/पिटाई करने की अनुमति करने की कृपा करें, जिससे मैं उसे रायपुर धरने में जाने से रोक सकंू।
दूसरे जवान ने बच्चों की देखभाल के लिए मांगी छुट्टी
वहीं दूसरे जवान प्रधान आरक्षक राजेंद्र राय क्रमाक 286 जिला बलरामपुर ने रघुनाथ नगर में पदस्थ हैं। उन्होंने भी पत्नी धमकी देने और हड़ताल पर चली जाने की स्थिति में बच्चों की देखभाल के लिए दो दिनों की (24 और 25 जून को) छुट्टी मांगी है। उन्होंने बताया है कि वे रघुनाथ नगर थाने में पदस्थ हैं और उसका परिवार वहां से बहुत दूर त्रिकुंडा परिसर में निवास करता है। इसलिए पत्नी यदि धरना में शामिल होने रायपुर चली जाती है तो दो बच्चों की देखभाल के लिए घर पर रहना जरूरी है।
पत्र सोशल मीडिया में वायरल
दोनों जवानों के पत्र बुधवार को सुबह से ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए। लोग दोनों पत्रों को न सिर्फ चटकारे लेकर पढ़ रहे बल्कि विभिन्न ग्रुपों में शेयर भी कर रहे हैं। आज दिनभर सोशल मीडिया में इन दो पत्रों की खूब चर्चा रही वहीं अन्य लोगों ने मीडिया ग्रुप में भी पत्रों को वायरल किया।
साप्ताहिक अवकाश के साथ पुलिस परिवार की यह मांगें
पुलिस परिजनों की मांगों में पौष्टिक आहार, मेडिकल भत्ता, वर्दीधुलाई भत्ता, साइकिल भत्ता, किट पेटी भत्ता में वृद्धि, मोबाइल भत्ता, यात्रा भत्ता, सुविधायुक्त आवास, साप्ताहिक अवकाश, ड्यूटी के समय का निर्धारण, आम्र्स बुलेटप्रूफ जैकेट, ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर शहीद का दर्जा और आश्रित परिवार को १ करोड़ बीमा का लाभ आदि मांग शामिल हंै।