सभा के लिए आज की तरह तामझाम करने की जरूरत नहीं होती थी। नेता का नाम सुनकर लोग भाषण सुनने एकत्र होते थे। खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर लोग भाषण सुनते थे।
भिलाई/दुर्ग. बात 1985 की है। भिलाई नगर विधानसभा का चुनाव था। तब हम युवाओं को भी पार्टी की ओर से कुछ जिम्मेदारी दी गई थी। उस चुनाव में डॉ विजयसिंह गुप्ता भाजपा के प्रत्याशी थे। इंटुक के रवि आर्या चुनाव जीते थे। एक और यूनियन नेता पीके मोइत्रा भी चुनाव मैदान में थे इसलिए चुनाव रोचक हो गया था। मोइत्रा कम्यूनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी थे। तब मैं भारतीय जनता पार्टी के भिलाई पश्चिम मंडल का महामंत्री था। मुझे पार्टी ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी थी।
नेता का नाम सुनकर लोग भाषण सुनने के लिए खुद एकत्र होते थे
भाजपा प्रत्याशी डॉ.विजय सिंह गुप्ता ने कहीं से एक स्कूटर लाकर मुझे दिया था। उसी स्कूटर से मैं अपने घर से कुर्सी, दर्री और गद्दा ले जाकर सेक्टर-6 ए मार्केट सभा की व्यवस्था करता था। मेरे साथ मेरे अन्य साथी भी होते थे। सभा के लिए आज की तरह तामझाम करने की जरूरत नहीं होती थी। नेता का नाम सुनकर लोग भाषण सुनने के लिए खुद एकत्र होते थे। खास बात यहा कि लोग सभा के अंत तक बैठे रहते थे। खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर लोग भाषण सुनते थे।
अब कार्यकर्ता बिना साधन के घर से नहीं निकलते
सिविक सेंटर में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवानी की सभा में अपने आप लोगों की भीड़ ऐसी जुटी थी कि हम खुद चकित थे। न कोई सुरक्षा का इंतजाम न आज की तरह ट्रैफिक की मारामारी। पूरी भीड़ ने अडवानी के सुना। वे मंच से उतर कर चले गए तब भी लोग जमे हुए थे। परिस्थितियां अब वैसी नहीं है। दिखावे का समय है। अब कार्यकर्ता बिना साधना के घर से नहीं निकलते। प्रचार का तरीका बदल गया है। उपहारों की भरमार हो गई है। उसके पीछे जनता और कार्यकर्ताओं में प्रत्याशी के लिए यह धारणा बन गई है कि चुनाव जीतने के बाद वह करोड़ों का मालिक बन जाता है। आम जनता के मन में यह धारणा चिंतनीय है।
राजनीतिक दल भाई-भतीजावाद से परे होकर सोचे
स्वच्छ, स्वस्थ और ईमानदार लोकतंत्र के लिए इस धारणा को दूर करना होगा। यह तभी दूर होगा, जब प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होगी। राजनीतिक दल भाई-भतीजावाद से परे होकर सोचेंगे तभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया सही ढंग से कायम मानी जाएगी। (जैसा भिलाई जिला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ब्रजेश बिजपुरिया ने बताया)