मलेरिया के बचाव के लिए नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें। डेंगू से बचने के लिए पानी कहीं ठहरने न दें। इससे मलेरिया और डेंगू जैसे गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
भिलाई. मलेरिया के बचाव के लिए नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें। डेंगू से बचने के लिए पानी कहीं ठहरने न दें। इससे मलेरिया और डेंगू जैसे गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। यह जानकारी इंडियन एकेडमी ऑफ शिशु रोग विशेषज्ञ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष सोन्स ने दीं। वे भिलाई में हुई एक कार्यशाला में यह पते की बातें बता रहे थे। इस दौरान देश के विभिन्न शिशु रोग विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।
डेंगू और मलेरिया पर दी विस्तृत जानकारी
इस कार्यशाला में डॉ. संतोष सोन्स ने संक्रामक रोग से कैसे बचें और बेहत इलाज के संबंध में भी बताया। टीकाकरण को महत्वपूर्ण बताया गया। इन बीमारियों के रोकथाम के लिए इंडियन एकेडमी ऑफ शिशु रोग विशेषज्ञ और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है। एकेडमी की सहायता से टीकाकरण अभियान को सफल बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है। डॉ. संतोष ने बताया कि 6 अग्रस्त से छत्तीसगढ़ सरकार टीकाकरण अभियान शुरू कर रही है। इस अभियान के तहत प्रदेश भर में 9 माह के बच्चों से लेकर 15 वर्ष के बच्चों का टीका लगाया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।
खसरा की रोकथाम के इंतजाम होंगे
इस अभियान का नाम एमआर कैंपेन मिजस रोबेला टीकाकरण रखा गया है। इसमें खसरा (माता) के दोनों रूपों का टीकाकरण किया जाएगा। ताकि बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। इसमें एकेडमी भी पूरा सहयोग करेगी। यह अभियान डेढ़ माह तक चलेगा। कार्यशाला में विशेष वक्ता के रूप में अकादमी के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष डॉ. पीके श्रीवास्तव, प्रतिनिधि डॉ. अमर सिंह ठाकुर, संचालन डॉ. उमेश खुराना, डॉ. अरविंद सावंत, सचिव राघवेंद सिंह और मुम्बई से आए डॉ. बाकूल परेख मौजूद थे। इसके अलावा डॉ. कृष्ण चुग, वेदांता दिल्ली से डॉ. वीणा, डॉ. नेहा, डॉ. अजीम, डॉ. मानिंदर धालीवाल ने भी अपनी बात रखी।
बरसात में सफाई सबसे जरूरी
एक्सपट्र्स ने बताया कि बारिश का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में डेंगू और मेलेरिया की शिकायत बढ़ेगी। इसलिए अपने आसपास और घरों में सफाई रखनी होगी। इसके अलावा शुद्ध पानी पीना और शुद्ध भोजना करना भी जरूरी है। खास कर बारिश के मौसम में दूषित भोजन बिलकुल भी न करें। कार्यक्रम के सेके्रटरी डॉ. सत्येंन ज्ञानी ने बताया कि मुख्य उद्देश्य एंटीबायोटिक का दूरपयोग और इसकी वजह से बैक्टेरिया में बढ़ता प्रतिरोध और उसके निदान पर चर्चा करना था।