पुलिस को पता चला है कि यश ग्रुप के संचालक ने देशभर में 25 फर्जी कंपनियों का जाल फैला रखा है। अब उसके खिलाफ पुलिस मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी।
भिलाई . पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया तो यश ग्रुप के डायरेक्टर अमित श्रीवास्तव के रोज चौंकाने वाले नए-नए कारनामे सामने आ रहे हैं। पुलिस को पता चला है कि यश ग्रुप के संचालक ने देशभर में 25 फर्जी कंपनियों का जाल फैला रखा है। अब उसके खिलाफ पुलिस मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी।
दो दिन पहले यश ग्रुप का महाकालेश्वर को-ऑपरेटिव सोसायटी बेमेतरा में संचालित होने का पता चला था। जिसमें बुधवार को प्रकरण दर्ज कर लिया गया। पुलिस अमित के पुलिस अभिरक्षा से भागने की घटना को इससे जोड़ रही है। पुलिस की जांच में यश ग्रुप के अलग अलग 25 कंपनियों को दस्तावेज मिले हैं।
पुलिस कर रही पूरे मामले की जांच
संचालक अमित विभिन्न प्रदेशों में कंपनियां खोल रखी है। वहां भी लोगों को दो -तीन गुना रकम देने की लालच देकर पैसा जमा करा रहा था। पुलिस इसकी जांच कर रही है। पुलिस की विशेष अपराध अनुसंधान इकाई के प्रभारी डीएसपी श्याम सुंदर शर्मा इस समय अपनी टीम के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
बता दें गैगस्टर तपन सरकार की बैरक में यश ग्रुप का संचालक अमित श्रीवास्तव भी रहता है। पता चला है कि जेल में अमित, तपन की भरपूरी सेवादारी करता है। तपन के खिलाफ उसी के गुर्गें सतीश चंद्राकर ने शिकायत की तब पुलिस ने जांच शुरू की और अब नए-नए खुलासे हो रहे हैं।
यश ग्रुप का पैसा अन्य प्रांतों की कंपनी में लगाया
यश ग्रुप के संचालक ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेवी) द्वारा रोक लगाने पर महाकालेश्वर को-ऑपरेटिव सोसायटी कंपनी बना लिया। यश ग्रुप के निवेशकों का पैसा इस कंपनी में ट्रांसफर करा दिया। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि यश ग्रुप के निवेशकों का पैसा अन्य प्रदेशों में संचालित कंपनियों में भी तो नहीं लगाया है।
आईजी जीपी सिंह ने बताया कि लोगों में गुंडे मवालियों के भय को पूरी तरह से खत्म करना है। ऐसे बदमाश जो लोगों से 5 से 10 प्रतिशत ब्याज वसूल रहे हंै उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। जमीन खोरी और ब्याज खोरी को नहीं चलने दिया जाएगा। यदि कोई डरा धमका कर ब्याज वसूल रहा है तो इसकी शिकायत करें। ऐसे अपराधियों को बिलकुल नहीं बख्शा जाएगा।
जानिए क्या होती है मनी लॉंन्ड्रिंग
अवैध तरीके से कमाए गए काले धन को वैध तरीके से कमाए गए धन के रूप में परिवर्तित करना मनी लॉन्ड्रिंग है। अधिवक्ता टीके चौहान के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग अवैध रूप से प्राप्त धन राशि को छुपाने का एक तरीका है। मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से कमाए गए धन पर सरकार को कोई कर नहीं मिलता है क्योंकि इस धन का कोई भी लेखा-जोखा सरकार के पास नहीं होता है। ऐसा धन अक्सर किसी कंपनी में निवेश, अचल संपत्ति खरीदने, लक्जरी सामान खरीदने आदि के माध्यम से वापस आता है।
लोग खुलकर आ रहे है सामने
लेखा किताब में गड़बड़ी करके और अन्य संदिग्ध लेनदेन करके अपनी असली आय को छुपा लिया जाता है। बाहर भेजा पैसा या देश में खपाया गया पैसा वापस लाउन्डरर के पास वैध धन के रूप में आ जाता है। पुलिस के मुताबिक गैगस्टर और उनके गुर्गों का कारनामा बताने अब लोग खुलकर सामने आ रहे है। धीरे- धीरे उनके मन से गुंडा बदमाशों का भय खत्म हो रहा है। इसलिए रोज लोग अपनी समस्या लेकर आ रहे हंै।
जानिए कब से लागू कानून
भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग कानून, 2002 में अधिनियमित किया गया था, लेकिन इसमें 3 बार संशोधन (2005, 2009 और 2012) किया जा चुका है। वर्ष 2012 के आखिरी संशोधन को ३ जनवरी 2013 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली थी। यह कानून 15 फरवरी 2013 से लागू है। अधिनियम के प्रावधान सभी वित्तीय संस्थानों, बैंकों, म्यूचुअल फंडों बीमा कंपनियों और उनके वित्तीय मध्यस्थों पर लागू होते हैं।