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मेरा पति सुधर नहीं रहा.. दो बच्चों को मौत की नींद सुलाने के बाद मां ने किया सुसाइड

Bhilai Child murder and Suicide Case: भिलाई/दुर्ग के आर्यनगर में साहू परिवार के चार सदस्यों की मौत की गुत्थी शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद काफी हद तक सुलझ गई है। रिपोर्ट में पति-पत्नी के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट के आधार पर पहले बच्चों की हत्या किए जाने की बात सामने आई है।

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Bhilai Suicide Case

Bhilai Suicide Case(photo-patrika)

Bhilai Suicide Case: छत्तीसगढ़ के भिलाई/दुर्ग के आर्यनगर में साहू परिवार के चार सदस्यों की मौत की - गुत्थी शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद काफी हद तक सुलझ गई है। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि पति गोविंद साहू और पत्नी चंचल साहू ने फंदे पर लटककर आत्महत्या की थी। वहीं चंचल के लिखे सुसाइड नोट के अनुसार उसने पहले दो मासूम बच्चों की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या की, उसके बाद खुद ने भी सुसाइड कर लिया। इस घटना से आहत होकर पति गोंविद ने की अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

Bhilai Suicide Case: गहने गिरवी रखकर किया था निवेश

मोहन नगर पुलिस अब घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट और शेयर ट्रेडिंग के भारी लेन-देन समेत विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से जांच कर रही है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि डॉक्टरों की शॉर्ट दोनों बच्चों व पत्नी के साथ गोविंद। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक दोनों बच्चों की मौत दम घुटने से हुई है और उनके गले पर रस्सी के गहरे निशान पाए गए हैं। पुलिस ने बच्चों का बिसरा सुरक्षित रख लिया है, जिसे आगे की जांच के लिए रायपुर फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा।

इस जांच से यह स्पष्ट होगा कि हत्या से पहले बच्चों को किसी तरह का नशीला पदार्थ या जहर तो नहीं दिया गया था। इसके साथ ही पुलिस ने मौके से मिले सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की भी विशेषज्ञों से जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि उसकी प्रामाणिकता और लेखन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

सुसाइड नोट ने खोली दर्दनाक कहानी की परतें

जांच में सामने आया है कि गोविंद साहू प्रिंटिंग प्रेस के संचालन के साथ-साथ गौना ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड नाम की फर्म चलाकर शेयर ट्रेडिंग का कारोबार करता था। कई निवेशक पुलिस के पास पहुंचने लगे हैं। निवेशक राजकिशोर ने पुलिस को बताया कि उसकी मां ने घर की जमा पूंजी और अपने सोने के गहने गिरवी रखकर गोविंद की फर्म में 17.50 लाख रुपए निवेश किए थे। गोविंद ने उन्हें हर महीने 4% ब्याज देने का झांसा दिया था। दो साल तक ब्याज मिला, बाद में भुगतान बंद हो गया। पुलिस को आशंका है कि निवेशकों के दबाव के चलते ही आत्मघाती कदम उठाया।