एक माह से मलमास के कारण मांगलिक कार्यों से विराम एक सप्ताह बाद हट जाएगा। 16 जनवरी से सावे शुरू होंगे और जमकर शहनाइयां गूंजेगी। इस वर्ष 16 जनवरी से 15 मार्च तक विवाह के कई शुभ मुहूर्त हैं।
एक माह से मलमास के कारण मांगलिक कार्यों से विराम एक सप्ताह बाद हट जाएगा। 16 जनवरी से सावे शुरू होंगे और जमकर शहनाइयां गूंजेगी। इस वर्ष 16 जनवरी से 15 मार्च तक विवाह के कई शुभ मुहूर्त हैं। 39 दिन तक शुभ मुहूर्त के मद्देनजर खरीदारी भी बढ़ गई है। सोने-चांदी से लेकर कपड़े और अन्य सामान की खरीदारी से व्यापारियों में उत्साह है।
15 मार्च से 16 अप्रेल तक 30 दिन तक खरमास के कारण विवाह नहीं होंगे। अप्रेल में 18 से 22 तक मुहूर्त हैं, लेकिन 23 अप्रेल से 30 जून तक फिर विवाह समारोहों पर विराम लगेगा। इस तरह 15 मार्च से जुलाई तक 98 दिन विवाह नहीं होंगे। जुलाई में विवाह के 6 मुहूर्त हैं। फिर 18 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चार माह तक विवाह नहीं होंगे।
गुरु व शुक्र की अहम भूमिका
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विवाह के लग्न मुहूर्त देखते समय गुरु और शुक्र ग्रह का अच्छी स्थिति में होना जरूरी है। इनमें एक भी ग्रह अस्त होने या खराब स्थिति में होने पर उस तिथि में विवाह का मुहूर्त नहीं बनता है। देवगुरु बृहस्पति और शुक्र देव को विवाह के लिए कारक माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु और शुक्र ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं तो जल्द शादी के योग बनते हैं। इन दोनों ग्रहों के कमजोर होने पर विवाह में बाधा आने लगती है। यह भी माना जाता है कि गुरु और शुक्र तारा के अस्त होने पर विवाह नहीं किया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार 23 अप्रेल से 30 जून के बीच शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण विवाह कार्य नहीं होगा।