भीलवाड़ा में निवासरत केरल के परिवारों द्वारा भगवान अयप्पा के उद्घोष के साथ निकाली गई अयप्पा शोभायात्रा में झलकी केरल संस्कृति
भीलवाड़ा।
वाद्य यंत्रों के साथ परम्परागत चेण्डामेलम और सिर पर फूलों से सजा कलश लिए अम्मकुडम नृत्य करते केरल के कलाकार। पारम्परिक परिधान पहने हाथों में सजी पूजा की थाली में नारियल का प्रज्ज्वलित दीप लिए कतारबद्ध होकर चलती पारम्परिक परिधान पहनी महिलाएं। नजारा था रविवार शाम भीलवाड़ा में निवासरत केरल के परिवारों द्वारा भगवान अयप्पा के उद्घोष के साथ निकाली गई अयप्पा शोभायात्रा का। शोभायात्रा में केरल संस्कृति झलकी।
श्री अयप्पा सेवा समिति द्वारा सुभाषनगर स्थित अयप्पा मन्दिर में मूर्ति स्थापना के आठवें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में निकली शोभायात्रा लोगों के आकर्षण का केन्द्र रही। केरल नृत्य व ढोल वादन का नजारा देखने के लिए शोभायात्रा मार्ग पर लोगों का हूजुम उमड़ता देखा गया। शोभायात्रा में पूरे रास्ते ढोल वादन व विशेष नृत्य आने जाने वाले लोगों को आकर्षित करता नजर आया। शोभायात्रा में नन्हे मुन्हे बच्चे भी उत्साह के साथ शामिल हुए। बच्चियां भगवान अयप्पा की पूजा के लिए पूरे रास्तें जलते हुए दीप व फूलों से सजी थाली लेकर चली।
शोभायात्रा गायत्री शक्तिपीठ से प्रांरभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए सुभाषनगर स्थित मन्दिर पहुंची। जहां भव्य रूप लिए मन्दिर में भगवान अयप्पा की महिलाओं व बालिकाओं ने नारियल में प्रज्ज्वलित दीपों से आराधना करते हुए सुख शान्ति की कामना की। रात्रि में सामूहिक अन्न प्रसाद वितरण हुआ। अध्यक्ष मोहनदास नायर व कोषाध्यक्ष राजीव पिल्लई सहित समिति के पदाधिकारियों ने शोभायात्रा की सफलता पर सभी केरलवासी परिवारों का आभार जताया।
हवन व भगवान अयप्पा का अभिषेक आज
श्री अयप्पा सेवा समिति के सचिव राजशेखरन पिल्लई ने बताया कि सोमवार को सुबह 5 बजे पट खुलने के साथ ही निर्मात्न्य दर्शन होंगे। इसके बाद 5:30 बजे अष्टद्रव्य गणपति हवन, 7 बजे प्रात:कालीन उषा पूजा आयोजित की जाएगी। 8 बजे से कलश पूजा, 11 बजे 108 कलशों को जल से भरकर भगवान का अभिषेक, दोपहर 12:30 बजे नागदेवता की पूजा की जाएगी। सायंकालीन वेला में 6:15 बजे दीपाराधना, 7 बजे पुष्पाभिषेकम, 7:30 बजे संध्या भजन, रात्रि 9 बजे शयन आरती होगी।