भीलवाड़ा

ईमानदारी अभी जिंदा है: भीलवाड़ा के बस कंडक्टर ने लौटाया ढाई तोले के सोने का हार, पेश की मानवता की अनूठी मिसाल

भौतिकवादी युग में जहां इंसानियत और ईमानदारी जैसे शब्द धुंधले पड़ते जा रहे हैं। वहीं, जिले में एक निजी बस परिचालक ने ईमानदारी का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने समाज का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

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Apr 20, 2026
मोनिता के परिजनों को सोने का हार लौटाता परिचालक गुलाबचंद (फोटो- पत्रिका) 

भीलवाड़ा: आज के इस भौतिकवादी युग में जहां अक्सर स्वार्थ और लालच की खबरें सुर्खियां बनती हैं। वहीं, राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से ईमानदारी की एक ऐसी सुखद तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवता पर विश्वास को और गहरा कर दिया है।

बता दें कि एक निजी बस परिचालक ने यात्री का गिरा हुआ कीमती आभूषण लौटाकर ईमानदारी की अनूठी मिसाल पेश की है।

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खुशी के माहौल में छा गया था सन्नाटा

मिली जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम की रहने वाली मोनिता बांगड़ रविवार सुबह अपने पीहर भीलवाड़ा में आयोजित एक शादी समारोह में शिरकत करने पहुंची थीं। वह निजी ट्रैवेल्स की बस से सफर कर रही थीं।

सुबह करीब छह बजे बस से उतरकर जब वह आरके कॉलोनी स्थित अपने घर पहुंचीं, तो उन्हें अहसास हुआ कि उनके गले से ढाई तोला वजनी सोने की चेन और पेंडल गायब है। गहना कीमती होने के कारण परिवार की खुशियां पल भर में चिंता में बदल गईं।

परिचालक की सक्रियता और ईमानदारी

हताश मोनिता ने तुरंत अपने पिता राधेश्याम चेचाणी और भाई मनीष को इसकी जानकारी दी। परिजनों ने बिना समय गंवाए बस के परिचालक गुलाबचंद से मोबाइल के माध्यम से संपर्क किया। गुलाबचंद ने फोन पर बात होते ही संवेदनशीलता दिखाई और तुरंत बस के भीतर गहन तलाशी शुरू की।

खोजबीन के दौरान वह कीमती हार बस की सीट और गेट के पास सुरक्षित पड़ा मिल गया। परिचालक ने ईमानदारी का परिचय देते हुए हार को सुरक्षित अपने पास रख लिया और परिजनों को आश्वस्त किया।

सौंपा कीमती आभूषण, समाज ने किया सम्मान

शाम को जब बस दिल्ली के लिए रवाना होने वाली थी, तब परिचालक गुलाबचंद ने मोनिता के परिजनों को 'चिराग ट्रेवल्स' के कार्यालय बुलाया। वहां उन्होंने पूरे मान-सम्मान के साथ कीमती आभूषण परिवार को सुपुर्द कर दिया। परिजन ने बताया, सोने की चमक से कहीं अधिक कीमती इंसान की नीयत होती है। गुलाबचंद जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं।

परिचालक गुलाबचंद के इस नेक कार्य की पूरे जिले में प्रशंसा हो रही है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि आज भी समाज में नैतिकता और इंसानियत जीवित है। परिजनों ने परिचालक का आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

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Published on:
20 Apr 2026 11:26 am
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